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Lucknow news- बेकाबू कार ने ली दो दोस्तों की जान, तीन बाल-बाल बचे

राजधानी के इटौंजा थानाक्षेत्र में शनिवार तड़के प्रतिबंधित मांस लदी बेकाबू कार सवार ने दो दोस्तों आशीष कुमार यादव (18) व राम प्रवेश यादव (18) की जान ले ली।

गनीमत रही कि दोनों के तीन अन्य साथी बाल-बाल बच गए। पांचों युवक सेना में भर्ती की तैयारी के लिए दौड़ लगा रहे थे। हादसे की सूचना पर दोनों के परिवारों में रोना-पीटना मच गया।

वहीं, आक्रोशित ग्रामीणों ने कुर्सी रोड पर शव रखकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। करीब चार घंटे बाद पुलिस के अफसराें के उचित कार्रवाई के आश्वासन पर ग्रामीण शांत हुए। जानकारी में आया है कि प्रतिबंधित मांस लदी कार बाराबंकी के कुर्सी की ओर से आ रही थी।

प्रदर्शन के दौरान ही ग्रामीणों ने करीमनगर के जंगल में दो संदिग्धों को पकड़कर पुलिस के हवाले किया। सीओ डॉ. हृदयेश कठेरिया के मुताबिक, मृतकों के परिवारीजनों की तहरीर पर कार सवारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।

कार में मिले मांस के नमूनों को जांच के लिए पशु चिकित्सालय भेजा गया है। जिला प्रशासन ने पकड़े गए दो आरोपियों के खिलाफ रासुका की कार्रवाई करने की बात कही है।

वहीं, देर रात पुलिस ने कार सवार दो आरोपियों सीतापुर के थानाक्षेत्र रामपुर मथुरा निवासी सैफुद्दीन और सीतापुर के सदरपुर के जुम्मन को गिरफ्तार कर लिया।

सीओ के मुताबिक, इटौंजा के दरियापुर स्थित मजरा बाजपुर गंगौरा निवासी आशीष यादव व रामप्रवेश यादव गांव के ही ललित कुमार, विपिन कुमार व संतोष कुमार के साथ सेना व पुलिस की भर्ती के लिए तैयारी कर रहे थे।

रोज की तरह पांचों युवक शनिवार तड़के पांच बजे इटौंजा-कुर्सी रोड पर दौड़ लगा रहे थे। कुछ दूरी पर राम प्रवेश व आशीष सड़क किनारे बैठकर सुस्ताने लगे।

जबकि ललित, संतोष व विपिन सड़क किनारे खड़े थे। इस बीच तेज रफ्तार कार ने आशीष व प्रवेश को रौंद दिया। दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। तीनों अन्य युवक बाल-बाल बच गए। हादसे के बाद कार अनियंत्रित होकर बिजली के खंभे से जा टकराई। कार में प्रतिबंधित मांस लदा था।

सीओ के मुताबिक, हादसे के बाद कार सवार करीमनगर के पास वन विभाग के जंगल की तरफ से भाग निकले। युवकों व ग्रामीणों ने पीछा किया, लेकिन कोई हाथ नहीं लगा।

इस बीच हादसे की सूचना पर आसपास के गांव के लोग जुट गए और करीमनगर गांव के पास शव रखकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। सूचना पर महिगवां चौकी प्रभारी सचिन कुमार व पीआरवी पहुंची।

प्रभारी निरीक्षक जितेंद्र कुमार सिंह, सीओ हृदयेश कठेरिया व एसपी ग्रामीण हृदयेश कुमार भी पहुंच गए। शांत कराने की कोशिश पर पुलिस की ग्रामीणों से नोकझोंक हुई।

ग्रामीणों ने कार सवारों की गिरफ्तारी व कार्रवाई के अलावा मृतकों के नाम से करीमनगर के पास द्वार बनवाने, परिवारीजनों को आर्थिक सहायता की मांग की। चार घंटे बाद अधिकारियों के आश्वासन पर प्रदर्शन समाप्त हुआ। इसके बाद पुलिस ने दोनों शव पोस्टमार्टम के लिए भिजवाए।

जवान बेटों की मौत से मां-बाप का बुरा हाल

हादसे की सूचना पर राम प्रवेश व आशीष के परिवार का बुरा हाल था। आशीष के परिवार में भाई, मां-पिता, तीन बहनें हैं जबकि राम प्रवेश के परिवार में पांच भाई, दो बहनें और माता-पिता हैं। देर शाम पोस्टमार्टम के बाद शव गांव पहुंचे तो कोहराम मच गया। भारी संख्या में पुलिस बल की मौजूदगी में अंतिम संस्कार किया गया।

चार किलोमीटर तक लगा रहीं वाहनों की कतारें

प्रदर्शन के चलते इटौंजा-कुर्सी मार्ग पर जाम के चलते चार किलोमीटर लंबी वाहनों की कतारें लग गईं। इससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। इस दौरान क्षेत्र पंचायत, जिला पंचायत और प्रधान पद के प्रत्याशी भी लोगों को समझाने में जुटे थे। वहीं, विश्व हिंदू परिषद के अलावा कई संगठन के पदाधिकारी व कार्यकर्ता भी पहुंच गए थे। सभी ने जांच की मांग की।

विधायक ने दिया कार्रवाई का आश्वासन

प्रदर्शन के दौरान पहुंचे विधायक अविनाश त्रिवेदी ने युवकों के परिजनों को दोषियों के खिलाफ जांच कराकर सख्त कार्रवाई कराने तथा उचित मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया। विधायक ने बताया कि क्षेत्रीय चौकी प्रभारी की कई शिकायतें आई हैं। क्षेत्र में गोकसी हो रही है। इसके कारण हादसे हो रहे हैं। उन्होंने बीकेटी से मामले की जांच कर गोकसी करने वाले कार सवारों पर कड़ी कार्रवाई के लिए कहा है।

चेयरमैन ने दी आर्थिक मदद

नगर पंचायत बख्शी का तालाब के चेयरमैन अरुण कुमार सिंह भी घटनास्थल पर पहुंचे तथा मृतकों के परिजनों को 25-25 हजार की आर्थिक मदद दी। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कराने का आश्वासन भी दिया।

जंगल के रास्ते होती है प्रतिबंधित मवेशियों की तस्करी

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जंगल के रास्ते प्रतिबंधित मवेशियों की तस्करी धड़ल्ले से हो रही है। आरोप है कि कई बार अधिकारियों से शिकायतें भी की गईं, लेकिन मामला सिफर है। आरोप है कि मवेशियों की तस्करी के खिलाफ अभियान के नाम पर वन विभाग रस्म अदायगी करता है।

करना चाहते थे देश की सेवा

ग्रामीणों ने बताया कि आशीष और राम प्रवेश का सपना था कि सेना की वर्दी पहनकर देश की सेवा करेंगे। इसीलिए वह रोजाना दौड़ने जाते थे। अक्सर दोनों साथ में रहते थे।

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