Home लखनऊ Lucknow news- भयावह: लखनऊ में कोरोना से मौतों का आंकड़ा 1000 पार,...

Lucknow news- भयावह: लखनऊ में कोरोना से मौतों का आंकड़ा 1000 पार, ज्यादा था जोखिम, फिर भी देर से पहुंचे अस्पताल

डॉ. सुनील अग्रवाल

उरई निवासी डॉ. सुनील अग्रवाल को संक्रमित होने के बाद 25 अप्रैल को केजीएमयू में भर्ती कराया गया। प्रदेश में पहली बार डॉ. सुनील को प्लाजमा थेरेपी दी गई। उन्हें डायबिटीज सहित अन्य समस्याएं थीं। तमाम प्रयास के बाद भी 9 मई को उनकी मौत हो गई।

भाजपा पार्षद वीरेंद्र

भाजपा नेता और इंदिरानगर वार्ड 86 के पार्षद वीरेंद्र कुमार उर्फ  बीरू 11 अगस्त को पॉजिटिव हुए। उन्हें एसजीपीजीआई में भर्ती कराया गया। ऑक्सीजन सपोर्ट दिया गया, लेकिन उनके फेफड़े ने काम करना बंद कर दिया। इसके चलते 31 अगस्त की शाम उनकी मौत हो गई।

सपा नेता एसआरएस यादव
सपा के वरिष्ठ नेता व एमएलसी एसआरएस यादव तीन सितंबर को कोरोना की चपेट में आए। इस पर उन्हें पीजीआई में भर्ती कराया गया, लेकिन आठ सितंबर को उन्होंने दम तोड़ दिया। मौत की वजह मल्टी ऑर्गन फेल होना बताया गया।

नर्सिंग अफसर आशा धूसिया
केजीएमयू के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की सीनियर नर्सिंग अफसर आशा धूसिया 19 सितंबर को पॉजिटिव हुईं। केजीएमयू की आईसीयू में शिफ्ट करने के बाद चिकित्सकों की टीम उनके इलाज में लगी थी। हालांकि, 21 सितंबर की शाम उनकी मौत हो गई।

1002, यह सिर्फ आंकड़ा नहीं है बल्कि ये वे लोग हैं जो कुछ माह पहले तक जीवित थे। हमारे बीच थे, हमसे बातें करते थे और खुली हवा में सांस ले रहे थे। जो आशियाने इनके होने से रौशन थे वहां अब केवल इनकी यादें और दीवार पर मुस्कुराती तस्वीरें ही रह गई हैं। जिन्होंने कोरोना से अपनों को खोया है, इसका दर्द वे ही जान सकते हैं। ये दर्द दिलों में बावस्ता है और लंबे समय तक सालता रहेगा।

सबसे अधिक मृत्यु दर सितंबर में 8.08 प्रतिशत थी।

प्रतीकात्मक तस्वीर
– फोटो : अमर उजाला

दुनिया से जाने वाले वापस तो नहीं आ सकते लेकिन हम जागरूक होकर और सावधानी बरतते हुए अपनों को इन आंकड़ों में शामिल होने से बचाने का प्रयास जरूर कर सकते हैं। …तो आइए संकल्प लें कि कोरोना को हराने के लिए खुद भी सतर्क व जागरूक रहेंगे और दूसरों को भी करेंगे। राजधानी में मौतों का आंकड़ा एक हजार पार होने पर चंद्रभान यादव की रिपोर्ट- 

मंगलवार को सात मौतों के साथ कोरोना से लखनऊ में दम तोड़ने वालों का आंकड़ा एक हजार को पार करते हुए 1002 पहुंच गया। मरने वाले कुल मरीजों में करीब 50 प्रतिशत वे हैं, जिन्होंने हाई रिस्क में होने के बाद भी अस्पताल आने में आनाकानी की। 

राजधानी में जान गंवाने वालों में करीब 15 प्रतिशत बाहरी जिलों के हैं। लखनऊ में संक्रमितों की संख्या 71,943 हो गई है, जिनमें 1002 की मौत हो गई है। इस तरह से देखा जाए तो मृत्यु दर 1.39 फीसदी है। हालांकि, यहां दम तोड़ने वाले बाहर के 156 मरीजों को कम कर दिया जाए तो मृत्यु दर 1.04 फीसदी हो जाती है। बाहरी जिलों से आने वाले बेहद गंभीर इन मरीजों में लिवर, किडनी, हार्ट सहित कई गंभीर बीमारियां थीं। राजधानी में सबसे अधिक मृत्यु दर सितंबर में 8.08 प्रतिशत थी।

ऑक्सीजन लेवल गिरते ही हो जाएं अलर्ट

प्रतीकात्मक तस्वीर
– फोटो : amar ujala

लोहिया संस्थान के इमरजेंसी मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. राजीव रतन सिंह बताते हैं कि कोरोना के केस में सबसे बड़ी भूमिका ऑक्सीजन लेवल की है। एक तरह से इसे सामान्य बुखार और कोरोना वायरस के असर के बीच पहचान के रूप में भी रख सकते हैं। जैसे ही ऑक्सीजन लेवल गिरने लगे, तत्काल डॉक्टर के पास पहुंचें।

सांस फूलने लगे तो भी तत्काल जांच कराएं और लेवल टू या थ्री के अस्पताल में भर्ती हो जाएं। यही कारण है कि हर व्यक्ति को घर में ऑक्सीमीटर रखने की सलाह दी जा रही है। सामान्य स्वस्थ व्यक्ति के खून में ऑक्सीजन का स्तर 95 से 100 फीसदी के बीच रहता है। ऐसे में 95 प्रतिशत से कम ऑक्सीजन के स्तर का मतलब है कि व्यक्ति के फेफड़ों में किसी तरह की परेशानी है। वहीं, 92 फीसदी से नीचे ऑक्सीजन के स्तर का मतलब है कि व्यक्ति की स्थिति गंभीर है और उसे अस्पताल ले जाने की जरूरत है। राजधानी में पहली मौत 15 अप्रैल को नजीराबाद के वृद्ध की हुई थी। इसके बाद 30 जून तक मरने वालों की संख्या 20 रही, लेकिन जुलाई में यह 101 पहुंच गई। इसके बाद अगस्त में 260, सितंबर में सर्वाधिक 342, अक्तूबर में 175, नवंबर में 73 लोगों की मौत के साथ आंकड़ा 995 पहुंच गया। एक दिसंबर को सात की मौत के साथ ग्राफ 1002 पर पहुंच गया

 

लापरवाही बनी बड़ी वजह

प्रतीकात्मक तस्वीर
– फोटो : Pixabay

डेथ ऑडिट करने वाली टीमों ने माना है कि तमाम अस्पताल कोविड के लक्षण होने के बाद ही सामान्य मरीज की तरह इलाज करते रहे और जब हालत गंभीर हुई तो जांच कराने की सलाह देते हुए रेफर कर दिया। वहीं, कई मरीज हाई रिस्क श्रेणी से जुड़ी बीमारियों के चपेट में थे, लेकिन पॉजिटिव आने के बाद भी होम आइसोलेशन में रहे। स्वास्थ्य विभाग के नोडल अधिकारी डॉ. ए राजा कहते हैं कि ये मरीज पहले अस्पताल आ गए होते तो इन्हें बचाया जा सकता था।
240 नए मरीज मिले
राजधानी में मंगलवार को सात कोरोना मरीजों की जान गई, जिनमें दो पड़ोसी जिलों के हैं। वहीं, 240 नए मरीज मिले तो 309 डिस्चार्ज हुए। इन दिनों 3573 एक्टिव केस है। इंदिरानगर में 18 और गोमतीनगर मेें 22 पॉजिटिव मिले।  रायबरेली रोड 15, आलमबाग 10, चौक 19, आशियाना 14, तालकटोरा 12, जानकीपुरम 13 और हजरतगंज में 11 लोग संक्रमण की जद में आ गए हैं। विकास नगर, चिनहट और हसनगंज में 10-10 लोग पॉजिटिव पाए गए हैं।

 

डॉ डी हिमांशु
– फोटो : अमर उजाला

कोरोना कितना घातक होगा, इसका अंदाजा किसी को नहीं था। जहां तक राजधानी की बात है तो केजीएमयू में पहला मरीज भर्ती किया गया और शायद मौत भी पहले यहीं हुई। समय के साथ पूरी टीम को बहुत कुछ सीखने को मिला। सरकार का पूरा साथ मिला। अस्पतालों में संसाधन बढ़े। मरीजों की संख्या के साथ लगातार नई दवाएं आ रही हैं। इसका कितना असर हो रहा है, इसका भी अब अंदाजा लगने लगा है। डॉक्टरों और कर्मचारियों के संयुक्त प्रयास के चलते कोरोना से मौतों को नियंत्रित करने में कामयाबी पाई है। अब तक मिले मरीजों के हिसाब से राजधानी में मौत का ग्राफ 1.3 प्रतिशत के आसपास है। इनमें 50 प्रतिशत से ज्यादा गंभीर बीमारियों वाले मरीज हैं। ऐसे में कह सकते हैं कि कोरोना को लेकर जितना डर था, मौत का आंकड़ा उससे कई गुना कम है। फिर भी हमारा प्रयास है कि कोरोना की चपेट में आने वाले किसी की भी मौत न होने पाए। इस दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। – डॉ. डी. हिमांशु, संक्रामक रोग नियंत्रण प्रभारी, केजीएमयू

 

संकल्प लें

प्रतीकात्मक तस्वीर
– फोटो : Pixabay

– मास्क लगा ही बाहर निकलेंगे। 
– सामाजिक दूरी का पालन करेंगे। 
– सैनिटाइजेशन का पूरा ध्यान रखेंगे।
– गले मिलने-हाथ मिलाने से बचेंगे।
– लक्षण मिलने पर जांच कराएंगे। 

आगे पढ़ें

सबसे अधिक मृत्यु दर सितंबर में 8.08 प्रतिशत थी।

Most Popular