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Lucknow news- भाजपा की साजिश के बावजूद सपा जीती विधान परिषद की तीन सीटें : अखिलेश यादव

समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि शिक्षक-स्नातक चुनाव में सत्ता के खुले दुरुपयोग के बाद भी झांसी से लेकर प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र काशी तक भाजपा को मुंह की खानी पड़ी है। सपा ने तीन सीटें जीतीं।

मुख्यमंत्री का भाग्य भी उनके क्षेत्र में काम नहीं आया। जनता ने भाजपा नेतृत्व को बता दिया है कि अब भाजपा से उसका विश्वास उठ गया है। भाजपा सरकार के फैसलों के खिलाफ किसान तो आंदोलित हैं ही, शिक्षक और स्नातक भी उनको सबक सिखाना चाहता है।

अखिलेश ने कहा कि विधान परिषद चुनाव में सपा की जीत और अपनी हार से बौखलाए भाजपाइयों ने मतगणना में घपले की कोशिश में झांसी की पुलिस पर जानलेवा हमला किया। इन हमलावरों की तुरंत गिरफ्तारी होनी चाहिए।

आगरा में सपा प्रत्याशी के खिलाफ सरकारी तंत्र साजिशों से बाज नहीं आया। हजारों मतपत्र मनमाने तरीके से रद्द कर दिए गए। यह सपा प्रत्याशी को पराजित करने का षड्यंत्र है। इन तरीकों से भाजपा के जीत के दावे अनैतिक हैं। अखिलेश ने परिषद चुनाव जीते सपा के तीनों प्रत्याशियों को बधाई भी दी।

सिर्फ ख्याली पुलाव पका रही भाजपा

अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा सरकार सिर्फ ख्याली पुलाव पका रही है। हवाई पुल बांधने में इसका कोई जवाब नहीं है। किसान और नौजवान सब परेशान हैं। सरकार के चार वर्ष होने को हैं, पर अभी तक जनता को कोई अपेक्षित परिणाम नहीं मिला है। सिर्फ उपलब्धियों का ढिंढोरा पीटा जा रहा है। फिल्म सिटी की योजना मनोरंजन का विषय बनकर रह गई है। आम लोगों के सब्र का बांध टूट चुका है।

अखिलेश ने कहा कि जब लॉकडाउन के हालात थे, छंटनी हो रही थी और लोग अपनी जान बचाने को सिर पर गठरी लादे पलायन कर रहे थे, तब भी आपदा में अवसर का खूब बहाना चला। लोकतंत्र में निर्लज्जता की यह पराकाष्ठा है। सरकार के आंकड़ों पर ही विश्वास किया जाए तो शैक्षिक संस्थाओं, मेडिकल संस्थानों और सरकारी विभागों में लाखों पद खाली हैं। नौकरियों में भर्ती पर विवाद थम नहीं रहे हैं।

पूर्व सीएम ने कहा कि भाजपा सरकार बड़े-बड़े ों पर सत्ता का धन खर्च कर अपनी नाकामयाबियां छुपाने का काम कर रही है। कौन-सी फैक्टरी या उद्योग लगाया, कहां विकास हुआ, जिससे रोजगार मिलने लगा है। सरकारी तौर पर निवेशकों के लिए सहूलियतों का पिटारा खोल दिया गया है, लेकिन यह पिटारा खाली का खाली ही दिखता है। जनता को वर्ष 2022 का इंतजार है, जब वह भाजपा नेताओं से उनके वादों का हिसाब लेगी।

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