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Lucknow news- भाजपा के एजेंडे का हिस्सा है गोरखपुर में सरकार का आज से मंथन

गोरखपुर में बृहस्पतिवार से शुरू हो रहा प्रदेश सरकार का पूर्वांचल के समग्र विकास की संभावनाओं पर तीन दिवसीय मंथन भाजपा के राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा भी है। इसका खाका 23 जनवरी 2014 को प्रधानमंत्री पद के भाजपा के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने खींचा था। उन्होंने गोरखपुर में विजय शंखनाथ रैली से लेकर वाराणसी एवं 2016 में गाजीपुर और बलिया तक की सभाओं में पूर्वांचल की बदहाली को मुद्दा बनाकर लोगों के दिल और दिमाग में भाजपा सरकार की जरूरत बैठा दी थी। साथ ही पूर्वांचल से कई प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री होने के बावजूद इस क्षेत्र की बदहाली को लेकर विरोधियों को कठघरे में खड़ाकर भाजपा की संभावनाओं के समीकरण साधे थे।

मोदी की रणनीति सफल रही। मोदी खुद पूर्वांचल के काशी से संसद पहुंचे और जिस पूर्वांचल में कभी भाजपा को सीटों के लाले लग जाते हैं वहां की ज्यादातर सीटों पर 2014 लोकसभा चुनाव, 2017 के विधानसभा चुनाव और 2019 के लोकसभा चुनाव में कमल खिलता चला गया।

मोदी के नेतृत्व में केंद्र और योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली प्रदेश सरकार ने चुनावी वायदों का ध्यान रखते हुए गोरखपुर से गाजीपुर तक न सिर्फ  स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार पर ध्यान दिया बल्कि युवाओं के रोजगार और बुनियादी सुविधाओं के विकास पर भी फोकस किया। गोरखपुर में खाद कारखाने का शिलान्यास, इंसेफलाइटिस जैसी महामारी से बच्चों को उबारने के इंतजाम, गाजीपुर में जवाहर लाल नेहरू के समय से अधूरे पड़े पुल के निर्माण, सड़कों के निर्माण, कोलकाता से काशी तक जल परिवहन, गंगा सफाई, सहित अनेक काम हुए हैं।

ये भी काम हुए
पूर्वांचल को बदहाली से उबारने का काम तो मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने 2014 से ही शुरू कर दिया था। योगी सरकार बनने पर एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) के जरिये पूर्वांचल के हर जिले के पारंपरिक उद्योग को ग्लोबल पहचान मिलनी शुरू हुई। नई चीनी मिलों की स्थापना पर काम और पूर्वांचल में पर्यटन उद्योग के विस्तार से पूर्वांचल की पहचान बदलने लगी है। प्रधानमंत्री मोदी ने 2016 में गोरखपुर में जिस बंद पड़े कारखाने का फिर शुरू करने के लिए उसके पुनरुद्धार का शिलान्यास किया था वह इसी वर्ष जून-जुलाई से उत्पादन शुरू कर देगा। एक्सप्रेस के किनारे बन रहे इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से पूर्वांचल औद्योगिक नक्शे पर भी चमकने लगेगा।

इसलिए गोरखपुर में मंथन
इतने काम होने के बावजूद सरकार की गोरखपुर में पूर्वांचल के समग्र विकास का ब्लू प्रिंट तैयार करने को सीएम योगी की अगुवाई में गोरखपुर विश्वविद्यालय 10 से 12 दिसंबर तक राष्ट्रीय वेबिनार व संगोष्ठी का आयोजन और मंथन यू ही नहीं है। इसके पीछे कहीं न कहीं 2022 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव की तैयारी भी है।

मुख्यमंत्री गोरखपुर में पूरी सरकार की तीन दिन की बैठक कराकर पूर्वांचल की धरती से ही पूर्वांचल के विकास और संभावनाओं की चिंता का ही संदेश नहीं देना चाहते बल्कि यह भी बताना चाहते हैं कि भाजपा की सरकार जमीनी सच्चाई समझकर योजनाओं को बनाना और चलाना चाहती है। तीन दिवसीय मंथन से वे पूर्वांचल के लोगों के दिल और दिमाग में ये बात भी बैठाना चाहते हैं कि पूर्वांचल की तस्वीर और बदलने तथा विकास के अधूरे काम पूरे करने के लिए भाजपा सरकार जैसी चिंता अन्य किसी दल को नहीं है।

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