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Lucknow news- मदद की आस में मरीज और परिजन परेशान, कोविड कमांड सेंटर व अधिकारियों से राहत न मिलने की शिकायत

शहर में बढ़ते कोरोना संक्रमित मरीजों को एकीकृत कोविड कमांड सेंटर से पर्याप्त राहत नहीं मिल पा रही। कोई दवा की किट न मिलने की शिकायत कर रहा है तो कोई अस्पताल में भर्ती न हो पाने की। कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग व सैंपलिंग में भी ढिलाई बरते जाने के आरोप लग रहे हैं। कुछ पीड़ित मरीजों ने मंगलवार को अमर उजाला से अपना दर्द बयां किया।

न दवाएं पहुंचीं, न कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग हुई, जूझ रही महिला

पिंक सिटी, पारा निवासी कल्पना शर्मा की कोविड रिपोर्ट 10 अप्रैल को पॉजिटिव आई थी। इसके बाद से लगातार कंट्रोल रूम पर कई बार उनके परिजनों ने शिकायत दर्ज कराई। इलाज के लिए संपर्क भी किया। इसके बाद कंट्रोल रूम, सीएम हेल्पलाइन, डीएम हेल्पलाइन से उनके पास फोन आते रहे, मगर उनके यहां न तो कोई दवाई देने आया और न ही कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग के लिए। 35 वर्षीय कल्पना शर्मा का कहना है कि पॉजिटिव होने के बाद तबीयत काफी बिगड़ गई। ऑक्सीजन लेवल 90 के नीचे चला गया। इसके बाद परिजनों ने कोविड कंट्रोल रूम पर फोन करना शुरू किया। दो दिन तक कोई संपर्क नहीं हुआ। तीसरे दिन हॉस्पिटल तय कराने के लिए डॉक्टर का फोन आया। उसके अगले दिन एंबुलेंस के लिए फोन आया। उनका भी पूछना था कि भर्ती होना है कि नहीं। इस समय तक खुद ही किसी तरह दवाओं का इंतजाम कर अपना इलाज कुछ परिचित व इंटरनेट पर मौजूद जानकारी से शुरू किया। चार दिन में खुद से ऑक्सीजन लेवल 92 पर पहुंच गया था। ऐसे में भर्ती होने के लिए मना कर दिया। 11 दिन पूरे हो रहे हैं। आज तक

कोई दवाई पहुंचाने या कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग के लिए नहीं आया।

सीएमओ के रेफरल लेटर के बावजूद नहीं किया भर्ती

एल्डिको उद्यान 2 निवासी ओम प्रकाश वर्मा (76) को गंभीर हालत में लेकर उनके परिजन अस्पताल दर अस्पताल भटकते रहे, लेकिन न तो किसी अस्पताल ने उन्हें भर्ती किया और न ही किसी अधिकारी ने कोई राहत दिलाई। तीमारदार आशुतोष ने बताया कि 18 अप्रैल को बुजुर्ग ओम प्रकाश वर्मा की रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। इसके बाद कोविड कमांड सेंटर से लेकर जिम्मेदार अधिकारियों तक को कई बार फोन किया। सीएमओ के रेफरल लेटर के बाद भी भर्ती नहीं किया गया। मंगलवार को उनका ऑक्सीजन स्तर 40 पहुंच गया, परिजन भटकते रहे। अंत में गंभीर हालत में ही परिजन उन्हें घर वापस ले गए।

पहली रिपोर्ट अपलोड नहीं हुई, दस दिन तक दौड़ती रहीं

केकेसी में शिक्षिका नीलम अग्रवाल के परिवार में पिता, भाई-भाभी समेत पूरा परिवार कोविड की चपेट में है। कहती हैं कि लोहिया अस्तपाल में टेस्ट कराया। पता चला कि नंबर गलत चढ़ जाने से रिपोर्ट नहीं अपलोड हुई। दस दिन इसी दौड़ धूप में निकल गए। इस दौरान अस्पताल, सीएमओ ऑफिस दौड़ती रहीं। कहा गया कि रिपोर्ट अपलोड नहीं होगी तो भर्ती नहीं किया जा सकता। इस दौरान कई जगह बेड खाली थे। थक हार कर दोबारा जांच करवाई तो सीएमओ ऑफिस ने कनेक्ट किया। पापा की हालत बिगड़ चुकी थी, इसीलिए उन्हें घर में रखा। अब भाई की चिंता है, कोई चेस्ट स्पेशलिस्ट से बात नहीं हो पा रही है। सरकारी हेल्पलाइन पर डॉक्टर से बात तो करा रहे हैं, लेकिन वे सिर्फ तीन-चार दवाओं के नाम ही जानते हैं। क्या फायदा ऐसी हेल्पलाइन का।

जगह नहीं मिली तो उन्नाव में भर्ती कराया

बालागंज में पूर्व पार्षद पंकज पटेल के राजधानी में ही रहने वाले परिचित सत्यपाल सिंह की कोविड रिपोर्ट एक दिन पहले पॉजिटिव आई थी। उन्होंने कोविड कमांड सेंटर व सीएमओ के यहां संपर्क किया। काफी कोशिश की कि हॉस्पिटल में भर्ती हो जाएं, लेकिन बात नहीं बनी। मंगलवार को पीड़ित का ऑक्सीजन लेवल 40 पहुंच गया। आनन-फानन में लखनऊ के अस्पतालों में जगह न मिलने पर मरीज को उन्नाव के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया।

जल्द सभी दिक्कतें होंगी दूर

कोविड कमांड सेंटर से जुड़ीं सभी शिकायतें जल्द दूर की जाएंगी। जिले में लेवल वन स्तर के सामान्य कोविड रोगियों के लिए तो अस्पताल पर्याप्त हैं, लेकिन गंभीर मरीजों के लिए दिक्कत है, इसीलिए मंगलवार को पांच बड़े अस्पतालों को आरक्षित किया गया है। जल्द ही आईसीयू बेडों की संख्या में इजाफा होगा और इससे लेवल टू व थ्री स्तर के रोगियों को बेड मिलने में देरी की शिकायत दूर होगी।

– डॉ. रोशन जैकब, प्रभारी जिलाधिकारी

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