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Lucknow news- मोदी की ‘पॉलिटिक्स ऑफ परफार्मेंस’ अभियान का हिस्सा हैं शर्मा

मोदी की ‘पॉलिटिक्स ऑफ परफार्मेंस’ अभियान का हिस्सा हैं शर्मा

– सिर्फ एमएलसी व भाजपा नेता बनने नहीं आए

– नौकरशाही पर नियंत्रण में भी निभाएंगे भूमिका

अखिलेश वाजपेयी

लखनऊ। पूर्व नौकरशाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी अरविंद शर्मा के भाजपा में शामिल होने के बाद उनकी भविष्य की भूमिका को लेकर राजनीतिक गलियारों में कयास लगाए जाने लगे हैं। कोई उनकी भूमिका को उप मुख्यमंत्री तो कोई गृहमंत्री के रूप में देख रहा है।

मूल रूप से मऊ जिले के रहने वाले पूर्व आईएएस अधिकारी की गृह राज्य में राजनीतिक पारी में भूमिका कैसी होगी, यह तो आने वाले समय में पता चलेगा, लेकिन राजनीति में कुछ भी अकारण नहीं होता है। इतना तो तय है कि मोदी के विश्वासपात्र नौकरशाह शर्मा सिर्फ एमएलसी या मंत्री बनने के लिए यूपी नहीं आए हैं। उनका भाजपा में आना पीएम मोदी के ‘पॉलिटिक्स ऑफ परफार्मेंस’ अभियान का हिस्सा है। सभी जानते हैं कि भाजपा की केंद्रीय राजनीति में आने और पीएम पद का दायित्व संभालने के साथ ही मोदी ने ‘पॉलिटिक्स ऑफ परफार्मेंस’ की नीति पर काम शुरू कर दिया था।

सेवानिवृत्त नौकरशाह और टेक्नोक्रेट प्रोफेशनल्स उनकी पहली पसंद रहे हैं। आरके सिंह, हरदीप पुरी से लेकर एस. जयशंकर तक को राजनीति में लाकर उन्हें मंत्री बनाना इसका प्रमाण है। संभवत: इसी प्रयोग को उन्होंने अरविंद शर्मा के जरिए यूपी में शुरू किया है। जिस तरह अभी हाल में ही उन्होंने विशेषज्ञों की भूमिका का महत्व बताते हुए नौजवानों से राजनीति में आने का आह्वान किया उसको देखते हुए यह निश्चित है कि अरविंद शर्मा के प्रशासनिक अनुभव का प्रदेश सरकार के प्रशासनिक ढांचे में किसी न किसी न किसी रूप में उपयोग अवश्य किया जाएगा।

संकट मोचक व सहायक

अरविंद शर्मा को पद कौन सा दिया जाएगा उससे ज्यादा यह समझना जरूरी है कि वह किस भूमिका में काम करेंगे। ऐसा लगता है कि उनकी भूमिका एक तरह से प्रदेश में प्रधानमंत्री के सपनों और संकल्पों के साथ योजनाओं को जमीन पर उतारने में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार की मदद करने तथा उसका तानाबाना तैयार करने की होगी। लोग शर्मा को वित्तीय मामलों का गहरा जानकार और कुशल प्रशासक बताते हैं। इस नाते प्रधानमंत्री उनके अनुभव और क्षमता का लाभ प्रदेश में सरकार के कामों को ठीक तरह से जनता के बीच पहुंचाने और उससे लोगों को प्रभावित करने की रणनीति पर सफलता से काम कराने में करना चाहते हैं। सभी जानते हैं कि प्रदेश में नौकरशाही को लेकर भाजपा विधायकों से लेकर कार्यकर्ता तक सवाल उठाते रहे हैं। आम लोगों की शिकायतों के निस्तारण में ढिलाई को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। निश्चित रूप से प्रधानमंत्री ने शर्मा के जरिए इन चुनौतियों से पार पाने की सोची है। शिकायतों के त्वरित निस्तारण और प्रशासनिक मशीनरी को सतत सक्रिय, संवेदनशील और गतिशील बनाकर लोगों को बदलाव का अहसास कराना एक तरह से शर्मा की भूमिका होगी।

2022 की तैयारियों का भी हिस्सा

जिस तरह 2022 के विधानसभा चुनाव को लेकर सपा ने आक्रामक रणनीति पर काम शुरू किया है उसको देखते हुए भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व का चौंकन्ना होना स्वाभाविक है। उसे अहसास है कि प्रदेश में सभी मिलकर भाजपा को किसी न किसी रूप में घेरने की सोचेंगे। मोदी प्रदेश से ही सांसद हैं। ऐसे में वे नहीं चाहेंगे कि 2022 के चुनाव नतीजों से भाजपा कहीं से भी कमजोर दिखे। स्वाभाविक रूप से उनकी चिंता यूपी में सरकार के कामों की ठीक तरह से लोगों के बीच पहुंचाकर उन्हें भाजपा के साथ जोड़े रखने की है। इसके लिए उन्होंने 20 वर्ष से परखे हुए प्रशासनिक अनुभव रखने वाले शर्मा को प्रदेश में पार्टी की राजनीति में प्रवेश दिलाकर एक तरह से भाजपा के मिशन 2022 को लेकर सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन और नौकरशाही का बेहतर उपयोग कर उसकी क्षमता का लाभ जनता को बेहतरी का एहसास कराने के लिए करने की सोची है। भले ही भूमिका कोई भी रहे।

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