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Lucknow news- यूपी: अब कम जमीन में भी पूरी हो सकेंगी हाईटेक टाउनशिप परियोजनाएं, कैबिनेट से मिली नई नीति को मंजूरी

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प्रदेश सरकार ने हाईटेक टाउनशिप परियोजनाओं में फंसे आवंटियों को बड़ी राहत देते हुए सात परियोजनाओं को पूरा करने के लिए पांच साल का अतिरिक्त समय सीमा देने के साथ ही 1500 एकड़ के क्षेत्रफल की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया है। 

बिल्डर कम जमीन उपलब्ध होने की स्थिति में भी परियोजना को पूरा किया जा सकेगा। इस संबंध में शासनादेश जारी होने के तीन माह के अंदर बिल्डर को परियोजना पूरी करने के संबंध में संशोधित डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) संबंधित विकास प्राधिकरणों को देना होगा। इससे संबंधित प्रस्ताव को बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट में मंजूरी दे दी गई है।

बता दें कि प्रदेश की राजधानी लखनऊ, वाराणसी, गाजियाबाद व नोएडा समेत कई शहरों में हाईटेक टाउनशिप योजना शुरू की गई थी। सरकार ने कुल 13 योजनाओं के लाइसेंस जारी किए थे, लेकिन लाइसेंस लेने के बाद भी 6 बिल्डरों ने काम शुरू नहीं किया, जबकि 7 बिल्डरों ने काम शुरू तो किया, लेकिन जमीन की व्यवस्था नहीं कर पाए। ऐसे में सभी योजनाएं वर्षो से अधूरी ही पड़ी हैं। जिन बिल्डरों ने काम शुरू किया था, उन्होंने बुकिंग करके पैसे भी जुटा लिए थे, पर न तो फ्लैट न दे पाए और न ही प्लाट। लिहाजा बुंकिंग कराने वाले आवंटी पिछले कई साल से परेशान घूम रहे हैं।

बिल्डर को 80 हजार रुपये प्रति एकड़ केदर से विस्तार शुल्क जमा करना होगा

प्रस्ताव के मुताबिक परियोजना पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय देने के एवज में बिल्डर को 80 हजार रुपये प्रति एकड़ केदर से विस्तार शुल्क जमा करना होगा। यह जानकारी देते हुए प्रमुख सचिव दीपक कुमार ने बताया कि हाईटेक टाउनशिप नीति में उच्चस्तरीय समिति को परियोजना अवधि 10 साल से अधिक विस्तार करने का अधिकार नहीं है। इसलिए ऐसी परियोजनाएं जिनकी अवधि शेष नहीं है उनको पूरा करने के लिए केस टु केस के आधार पर 80 हजार रुपये प्रति एकड़ अविसकित क्षेत्रफल की दर से विस्तार शुल्क लेकर पांच साल का समय दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि विकासकर्ता को समय विस्तार शुल्क का भुगतान एकमुश्त या चार छमाही किस्तों में करना होगा।

लेना होगा त्वरित फैसला

प्रमुख सचिव ने बताया कि विकास प्राधिकरणों को प्रत्येक बोर्ड की बैठक में हाईटेक टाउनशिप परियोजनाओं की समस्याओं व प्राधिकरण पर लंबित मामलों की समीक्षा करते हुए त्वरित फैसला लेना होगा। शासन स्तर पर हर छह माह में हाईटेक टाउनशिप परियोजना प्रगति की समीक्षा की जाएगी। प्रत्येक चरण का डिटेल लेआउट प्लान तभी स्वीकृत किया जाएगा जब मूलभूत सुविधाओं विशेषकर बिजलीघर और एसटीपी के प्रस्ताव विकासकर्ता के स्वामित्व की भूमि पर होगी।

परियोजना के अन्य विकास कार्यों की प्रगति के अनुपात में मूलभूत सुविधाओं का भी विकास निर्माण किया जाना जरूरी होगा। परफार्मेंस गारंटी के रूप में 25 प्रतिशत जमीन बंधक रखी जाएगी। बिल्डर द्वारा काम अधूरा छोड़े जाने पर इसे बेचकर पूरा कराया जाएगा। न्यायालय से स्थगनादेश, नियामक या शासकीय अभिकरण की कार्यवाही के फलरूप परियोजना में देरी होने पर इस अवधि को शून्य माना जाएगा।

इन 7 परियोजनाओं को मिलेगा लाभ

-अंसल प्रापर्टीज, लखनऊ

– गर्व बिल्डटेक, लखनऊ

– उप्पल-चड्ढा, गाजियाबाद

– सनसिटी, गाजियाबाद

– सनसिटी, मथुरा

– उत्तम स्टील्स, बुलंदशहर

– पंचम रियकॉन, प्रयागराज

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