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Lucknow news – यूपी में GST Tribunal के गठन पर अंतरिम रोक: चीफ जस्टिस ने कहा- हाईकोर्ट की अनुमति जरुरी, 15 मार्च को होगी अगली सुनवाई

इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को एजुकेशन ट्रिब्यूनल को इसी प्रकार बिना कोर्ट की अनुमति के गठन पर रोक लगा दी थी।

चीफ जस्टिस गोविंद माथुर एवं जस्टिस ऋतुराज अवस्थी की पीठ ने अवध बार एसोसिएशन की जनहित याचिका पर पारित किया आदेश

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने गुरुवार को बिना उसकी अनुमति के जीएसटी ट्रिब्यूनल (GST Tribunal) के गठन पर अंतरिम रोक लगा दी है। यह आदेश चीफ जस्टिस गोविंद माथुर एवं जस्टिस ऋतुराज अवस्थी की पीठ ने अवध बार एसोसिएशन की जनहित याचिका पर पारित किया। कहा कि केंद्र सरकार और जीएसटी कौंसिल को ट्रिब्यूनल गठित करने के लिए हाईकोर्ट की अनुमति लेनी होगी। मामले की अगली सुनवाई 15 मार्च को होगी।

इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस गोविंद माथुर और जस्टिस एमएस शमशेरी की अध्यक्षता वाली पीठ ने शिक्षा सेवा अधिकरण (Education Tribunal) के गठन के बारे में भी ऐसा ही आदेश 3 मार्च को पारित किया था कि बिना उसकी अनुमति के उसका गठन नहीं होगा।

लखनऊ और प्रयागराज के अधिवक्ताओं के बीच तकरारएडीशनल सालिसिटर जनरल शशि प्रकाश सिंह ने पीठ को बताया कि केंद्र व जीएसटी कौंसिल ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के 9 फरवरी 2021 के एक आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दाखिल करने का निर्णय लिया है। इस आदेश से इलाहाबाद हाईकोर्ट ने समय सीमा के भीतर जीएसटी कौंसिल प्रयागराज में गठित करने का आदेश दे दिया था।

अवध बार एसोसिएशन की याचिका पर इसके अध्यक्ष व वरिष्ठ अधिवक्ता एचजीएस परिहार व अन्य वरिष्ठ अधिवक्ता जेएन माथुर व एलपी मिश्रा ने तर्क देते हुए कहा कि पहले जीएसटी कौंसिल ने अपीलेट ट्रिब्यूनल लखनऊ में गठित करने का निर्णय लिया था। लेकिन बाद में अपना निर्णय बदल दिया जो कि बिना किसी आधार के व सरासर गलत है। उन्होंने कहा कि ऐसा इलाहाबाद हाईकोर्ट की एक पीठ द्वारा जीएसटी के अधिकारियों की बार-बार तलबी से तंग आकर किया गया था। कहा गया कि लखनऊ में ट्रिब्यूनल बनने से वादकारियों को ही सुविधा होगी।

उधर… अधिवक्ताओं का विरोध प्रदर्शन जारी

बता दें कि लखनऊ खंडपीठ का क्षेत्राधिकार बढ़ाने व नए बनने वाले सभी ट्रिब्यूनलों को प्रदेश की राजधानी में गठित करने का इलाहाबाद के अधिवक्ता सदैव विरोध करते हैं। वहीं, लखनऊ के अधिवक्ताओं ने इस मुद्दे पर आर-पार की लड़ाई लड़ने का ठान लिया है। इसी क्रम में 24 फरवरी से चल रहा न्यायिक कार्य के बहिष्कार को बढ़ा दिया गया है। अधिवक्ता शुक्रवार को भी न्यायिक कार्य से विरत रहकर अध्यक्ष एचजीएस परिहार के नेतृत्व में धरना प्रदर्शन जारी रखेंगे। महामंत्री शरद पाठक ने बताया कि 6 मार्च को आस-पास के उन जिलों की बार एसोसिएशन को आमंत्रित किया गया है, जिनको लखनऊ खंडपीठ से जोड़ने की मांग की जा रही है।

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