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Lucknow news- राजधानी के विकास का 100 करोड़ दबाए बैठे हैं कई सरकारी महकमे

प्रवेंद्र गुप्ता

सरकारी महकमे गृहकर के रूप में राजधानी के विकास का 100 करोड़ रुपये दबाए बैठे हैं। इसमें राज्य संपत्ति विभाग पहले नंबर पर, एलडीए दूसरे और पुलिस विभाग तीसरे नंबर पर है।

अगर यह पैसा मिल जाए तो सड़क, नाली, फुटपाथ, सफाई और पेयजल जैसी सुविधाएं और बेहतर हो सकती हैं। नगर निगम द्वारा बिल और नोटिस जारी किए जाने के बावजूद ये विभाग टैक्स नहीं चुका रहे हैं।

पार्षदों की संस्तुति पर निगम हर साल करीब 100 करोड़ रुपये 110 वार्डों में आवंटित करता है। इस वक्त हर वार्ड में करीब 95 लाख का पार्षद कोटा है।

यह बजट नगर निगम की होने वाले आय से खर्च किया जाता है और गृहकर सबसे बड़ी आय है। पर सरकारी विभागों से बकाया टैक्स न मिलने के चलते निगम की आमदनी गिरी है।

ऐसे में नए बजट में पार्षद कोटे को भी समाप्त करने की तैयारी है। इससे पार्षद की संस्तुति पर वार्डों में होने वाले नाली, खड़ंजा, क्रॉसिंग सहित कई जरूरी काम नही हो पाएंगे।

जानकार कहते हैं कि यदि बकाया टैक्स मिल जाए तो एक साल के लिए वार्डों में विकास कार्य का बजट जुट जाएगा।

दो दर्जन विभागों पर बकाया है गृहकर

सिंचाई, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, परिवहन, नियोजन वन विभाग, सहकारिता, शिक्षा व उद्यान सहित करीब दो दर्जन विभाग विभागों पर नगर निगम का करोड़ों रुपये गृहकर बकाया है। अब चालू वित्तीय वर्ष समाप्त होने में महज 14 दिन हैं। बकाया वसूली को लेकर निगम की ओर से पत्र भी लिखे गए हैं, लेकिन मामला सिफर है।

टाप फाइव सरकारी बकाएदार

राज्य संपत्ति विभाग : 45 करोड़

एलडीए : 18 करोड़

पुलिस विभाग : 17 करोड़

लोक निर्माण विभाग : 07 करोड़

राजस्व परिषद : 05 करोड़

पहले मंत्रियों से खुद मिलेंगे, फिर पत्र लिखेंगे

महापौर संयुक्ता भाटिया कहती हैं कि एक बार कई मंत्रियों से मिले थे। सबने आश्वासन दिया था, पर टैक्स नहीं आया। अब फिर सभी मंत्रियों से खुद मिलने जाऊंगी। इसके बाद पत्र भी लिखेंगे। टैक्स ने मिलने से विकास कार्यों के लिए बजट पर भी असर पड़ रहा है। गृहकर निगम की आय का प्रमुख जरिया है। टैक्स ही नहीं आएगा तो काम कैसे चलेगा।

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