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Lucknow news- राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष ने कहा, कहीं न हो सुनवाई तो महिला आयोग करेगा कार्रवाई

लखनऊ। राज्य महिला आयोग जन सुनवाई के जरिये हर पीड़िता की मदद कर रहा है। हर माह पहले व तीसरे बुधवार को जन सुनवाई का आयोजन प्रदेश में होता है। इसके अलावा कई हेल्पलाइन हैं, जहां से मदद ली जा सकती है। इसके बाद भी कहीं मदद नहीं मिलती तो महिला आयोग हमेशा हर बच्ची व महिला की सुरक्षा और मदद के लिए है। आप हमें बताएं, हम कार्रवाई करेंगे। यही आश्वासन राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष विमला बाथम ने शहर की महिलाओं और युवाओं को मंगलवार को अमर उजाला कार्यालय में आयोजित संवाद कार्यक्रम में दिया।

अमर उजाला द्वारा ‘महिला आयोग और हमारे अधिकार’ विषय पर आयोजित संवाद में अध्यक्ष ने बताया कि अब तो आयोग आने की भी जरूरत नहीं है। पीड़िता अपनी शिकायत आयोग की वेबसाइट [email protected] या व्हाट्सएप नंबर 6306511708 पर दर्ज करा सकती हैं। इन शिकायतों का त्वरित निस्तारण होगा।

डरो मत, भिड़ जाओ, बाकी हम देख लेंगे

खुनखुनजी पीजी गर्ल्स कॉलेज की छात्राओं नैंसी व स्वाति का सवाल था कि राह चलते शोहदे आज भी मुसीबत बने हैं। इससे हमारे माता-पिता बाहर आने-जाने से भी डरते हैं। विमला बाथम ने कहा कि 10 छात्राएं मिलकर जाओ, उनका मुंह तोड़ जवाब दो। बाकी जो होगा हम देख लेंगे।

काम और उत्पाद की मार्केटिंग कैसे करें

महिलाएं काम तो बहुत कर रही हैं, लेकिन उनको मार्केटिंग की दिक्कत है। ग्रासरूट लेवल तक की इस जरूरत को कैसे पूरा किया जाए। इसके अलावा मुख्यधारा की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी कैसे बढ़े। ऐमरन फाउंडेशन की अध्यक्ष व उद्यमी रेणुका टंडन के इस सवाल पर विमला बाथम ने कहा कि सीधे जिलाधिकारी से मिलिए। केन्द्र व राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ मिलेगा। उन्होंने ये भी कहा कि राजनीति में महिलाओं की भागीदारी को सरकार तवज्जो दे रही है।

इन्होंने भी किए सवाल, दिए सुझाव

– फिक्की की इलेक्ट चेयरमैन आरुषि टंडन ने पूछा कि फिक्की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने को बहुत काम कर रहा है। महिला आयोग से जुड़ कर यदि हम काम करना चाहें तो कैसे संभव है।

– विशालाक्षी फाउंडेशन के अलिंद अग्रवाल ने पूछा कि हम युवाओं की टीम आयोग से जुड़कर काम करना चाहती हैं, समाज के निर्बल तबके की मदद करना चाहती है।

– मास कॉम के स्टूडेंट परमानंद ने पूछा कि महिला आयोग के अधिकार कहां तक हैं और किसी परेशानी के वक्त किस तरह से मदद मिल सकती है।

– विशालाक्षी फाउंडेशन की अंजलि तिवारी ने कहा कि हम आजादी चाहते हैं, डर के बिना जीना चाहते हैं, इसमें किस तरह से आयोग हमारी मदद कर सकता है।

– अर्चिता तिवारी ने कहा कि मुझे फोन पर डराया गया, मैंने 1090 पर शिकायत की, लेकिन मदद नहीं मिली, ऐसे में क्या करूं।

– सुषमा झिंगरन ने पूछा कि महिला आयोग में शिकायत करने व न्याय पाने के लिए क्या करना होगा। क्या यहां हर आम आदमी की सुनवाई होती है।

– लक्षिका ग्रुप की संस्थापक उषा अग्रवाल ने पूछा कि दादा-दादी के अधिकारों क ो लेकर आयोग क्या मदद कर सकता है। तलाक के बढ़ते मामलों के कारण पोता-पोती दूर होते जा रहे हैं, आयोग को दखल देना चाहिए।

– सोशल एक्टिविस्ट, राजनीतिज्ञ शबनम पांडेय ने सुझाव दिया कि महिलाओं के स्वास्थ्य व जागरूकता को लेकर आयोग अभियान चला सकता है। इस पर अध्यक्ष ने कहा कि आप शुरुआत कीजिए, हम आपके साथ खड़े हैं।

– बीइंग ए वीमन फाउंडेशन की संस्थापक सलोनी केसरवानी ने घरेलू हिंसा के बढ़ते मामलों क ा हवाला देत हुए पूछा कि ऐसी महिलाओं को न्याय आज भी मुश्किल है। किस तरह न्याय की राह आसान बनाई जा सकती है।

– सोशल एक्टिविस्ट नम्रता तिवारी ने महिला रोजगार पर फोकस किया। उन्होंने कहा कि रोजगार योजनाओं का फायदा महिलाओं तक कैसे पहुंचेगा।

– बीकेटी से आई प्रधान विनीता वर्मा ने कहा कि काम बहुत हो रहा, स्वयं सहायता समूह भी सक्रिय हैं, लेकिन योजनाओं तक पहुंच न हो पाने से आत्मनिर्भरता की रफ्तार धीमी है।

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