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Lucknow news- रेफर मरीजों से ट्रॉमा ओवरलोड, स्ट्रेचर पर करना पड़ रहा इलाज

वेंटिलेटर से बेड तक फुल, अति गंभीर मरीजों का इलाज मुश्किल

केस-1

गोमती नगर निवासी बुजुर्ग महिला दुर्गों सेठ (70) को सांस लेने में तकलीफ होने पर घर वाले गुरुवार दोपहर लोहिया संस्थान ले गए। वहां जांच में ऑक्सीजन लेवल 60 से 65 के करीब मिला। डॉक्टरों ने ऑक्सीजन लेवल बेहद कम होने की बात कह मरीज को ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया गया।

केस-2

रायबरेली निवासी 55 वर्षीय सिराज हादसे में जख्मी हो गए थे। घर वाले उन्हें लेकर पीजीआई एपेक्स ट्रॉमा सेंटर पहुंचे, लेकिन इसे कोविड हॉस्पिटल बनाए जाने के चलते मरीज को लोहिया संस्थान भेजा गया। लोहिया की इमरजेंसी में मौजूद डॉक्टर ने बेड का संकट बताकर मरीज को केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया।

केस-3

अलीगंज निवासी व्यक्ति को हेड इंजरी होने पर बुधवार देररात तीमारदार बलरामपुर अस्पताल ले गए। वहां स्टाफ ने रात में सीटी स्कैन न होने की बात कह ट्रॉमा सेंटर ले जाने की सलाह दी। तीमारदार मरीज को लेकर ट्रॉमा सेंटर के होल्डिंग एरिया में पहुंचे। इसके बाद उसको इलाज मिला।

हिमांशु अवस्थी

राजधानी के सरकारी अस्पतालों से बेतहाशा ढंग से मरीजों को रेफर किए जाने से केजीएमयू का ट्रॉमा सेंटर ओवरलोड हो गया है। ट्रॉमा के चिकित्सकों का कहना है कि अस्पतालों से रोजाना 20 फीसदी ऐसे मरीज रेफर कर दिए जा रहे हैं, जिनका इलाज संबंधित अस्पताल खुद कर सकते हैं। इससे अतिगंभीर मरीजों के इलाज में मुश्किल हो रही है। आलम यह है कि ट्रॉमा सेंटर के कई विभागों में बेड फुल होने से स्ट्रेचर पर इलाज करना पड़ रहा है। ये तीन उदाहरण इसकी बानगी है।

केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर में राजधानी के सरकारी व निजी अस्पतालों से रोजाना औसतन 40 से 50 मरीज रेफर होकर पहुंच रहे हैं। वहीं पीजीआई के एपेक्स ट्रॉमा सेंटर को कोविड अस्पताल बनाए जाने के कारण बाहरी जनपदों के 10 से 15 मरीज भी रेफर होकर केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर आ रहे हैं। इससे यहां बेड से लेकर वेंटिलेटर तक के लिए मारामारी मची हुई है। मरीजों को बेड व वार्ड में शिफ्ट होने में दो से तीन दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है।

ट्रॉमा सेंटर के डॉक्टरों का कहना है कि अस्पतालों में इलाज की सुविधा होने के बाद भी मरीजों को रेफर किए जाने से ट्रॉमा सेंटर में अति गंभीर मरीजों को इलाज देने में परेशानी आती है। न्यूरो सर्जरी, ट्रामा सर्जरी, ऑर्थोपेडिक, इमरजेंसी मेडीसन, बाल रोग विभाग में वेंटिलेटर से लेकर बेड का संकट खड़ा है। मरीज को होल्डिंग एरिया में रखने बाद वार्ड में शिफ्ट करने में दो से तीन दिन लग रहे हैं। तब तक मरीज स्ट्रेचर पर पड़े रहते हैं।

मरीजों का बहुत है बोझ

अस्पतालों से मरीजों को बेतहाशा रेफर किए जाने से इस समय ट्रॉमा सेंटर में मरीजों का बोझ बहुत है। ट्रॉमा के सभी विभागों में बेड और वेंटिलेटर भरे हैं।

डॉ. संदीप तिवारी, सीएमएस केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर

एपेक्स ट्रॉमा के कोविड हॉस्पिटल बनने से बाहरी मरीजों का बढ़ा लोड

पीजीआई के एपेक्स ट्रॉमा सेंटर को कोविड में बदले जाने बाद से प्रयागराज, सुलतानपुर, रायबरेली व अमेठी सहित अन्य जिलों से आने वाले मरीज भी केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर आ रहे हैं। बाहरी जिलों से रोजाना औसतन करीब 15 से 20 मरीज रेफर होकर यहां पहुंच रहे हैं।

कई विभागों में स्ट्रेचर पर इलाज की विवशता

ट्रॉमा सेंटर के ऑर्थोपेडिक, ट्रॉमा सर्जरी, न्यूरो सर्जरी में बेड फुल होने के कारण इस समय करीब 40 से 50 मरीजों को स्ट्रेचर पर रख कर इलाज किया जा रहा है। डॉक्टरों का कहना है विभाग में बेड खाली होने पर मरीजों को स्ट्रेचर से हटाकर बेड पर शिफ्ट कर दिया जाता है।

केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर

बेड 442

वेंटिलेटर 63

स्ट्रेचर पर भर्ती 50

औसतन रेफर मरीज

लोहिया 10 से 12

बलरामपुर 5 से 6

सिविल 4 से 7

पीजीआई 10 से 12

निजी अस्पताल 20 से 30

गैर जनपद से 10 से 15

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