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Lucknow news- लंतरानी समारोह में प्रदेश के कानून मंत्री को मिला पहला पत्नी भक्त सम्मान

कहीं कहकहे तो कहीं वाह…वाह की दाद का शोर था। मौका था बृहस्पतिवार को गोमतीनगर स्थित लोहिया पार्क में आयोजित लंतरानी सम्मान समारोह व कवि सम्मेलन का। आयोजन अवधी विकास संस्थान और साहित्यगंधा की ओर से किया गया। समारोह का मुख्य आकर्षण रहा पहला पत्नी भक्त सम्मान, जो प्रदेश के कानून मंत्री ब्रजेश पाठक को दिया गया। वहीं पत्नी चापलूस का सम्मान मुकेश बहादुर सिंह को मिला। लकी ड्रॉ में ब्रजेश पाठक को सरसों का तेल, उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा को कद्दू और महापौर संयुक्ता भाटिया को नमक मिला। वहीं लंतरानी सम्मान-2021 से नवाजे गए ग्वालियर के हास्य कवि तेज नारायण बेचैन।

फायर राउंड : राहुल या ओवैसी नहीं चाहिए, नहीं बनाऊंगा सरकार

कार्यक्रम की शुरुआत में डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा के साथ सवाल-जवाब राउंड में लंतरानी के संस्थापक और स्माइल मैन सर्वेश अस्थाना ने कई सवाल पूछे। पहला सवाल था कि राहुल या ओवैसी में से दो विकल्प हों तो किसके साथ सरकार बनाएंगे। डिप्टी सीएम ने कहा कि मैं सरकार ही नहीं बनाऊंगा। दूसरा सवाल था कि राष्ट्रपति या मुख्यमंत्री पद में से कौन सा विकल्प चुनेंगे। डॉ. शर्मा ने कहा कि मैं सरकार में रहना पसंद करूंगा। सवाल था पत्नी से डरते हैं या नहीं, डिप्टी सीएम ने कहा बिल्कुल नहीं, हालांकि इस पर स्माइल मैन ने दावा किया कि दुनिया का कोई शख्स ऐसा नहीं जो पत्नी से नहीं डरता। महापौर संयुक्ता भाटिया से सवाल-जवाब की बारी आई तो मेट्रो स्टेशन, वार्डों की संख्या जैसे सवाल हुए, साथ ही 15 मिनट तक नमक के बारे में बोलने को कहा गया।

लकी ड्रॉ के उपहार देख खूब छूटी हंसी

लंतरानी अवॉर्ड में शामिल अतिथियों के लिए कुछ पर्चियां लिख कर डाली गई थीं। इसमें से बारी-बारी से सबको एक-एक पर्ची उठाने को कहा गया। कानून मंत्री को पर्ची उठाने पर सरसों का तेल, महापौर को नमक और उपमुख्यमंत्री को कद्दू मिला। कार्यक्रम के अंत में श्रोताओं को भी लकी ड्रॉ के माध्यम से नकद पुरस्कार राशि देकर सम्मानित किया गया।

कविताओं की हर पंक्तियों पर लगे ठहाके

मुकुल महान के चुटीले संचालन में हास्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें आमंत्रित हास्य कवियों ने अपनी कविताओं के माध्यम से लंतरानी को आगे बढ़ाते हुए श्रोताओं को देर तक ठहाके लगवाए।

ग्वालियर के हास्य कवि तेज नारायण बेचैन ने व्यवस्था पर तंज करते हुए सुनाया… इससे बड़ी लंतरानी क्या होगी, सूर्योदय लाने का वादा वे लोग कर रहे हैं, जिनके खुद के चुनाव चिन्ह लालटेन हैं…। बाराबंकी के धुरंधर हास्य कवि डॉ. अनिल बौझड़ ने सुनाया, ‘न समझौ बात ठिठोली कै, परधान चुनौ हमजोली कै।’ बाराबंकी के ही कवि गजेन्द्र प्रियांशु ने ‘रंग से रंग मिले इतने खुद रंग में डूबी नहा गई होली, प्रीति पुरातन जाग गई फि र प्रीति पुनीत जगा गई होली…’ सुनाकर फाग का वर्णन किया। अयोध्या के कवि ताराचंद तन्हा ने सुनाया, अइसन बानी बोलिए, रोजै झगड़ा होय….’ पंकज प्रसून ने अपने अंदाज में… जनता बस चुटकुलों के पीछे बावरी हो रही है, ट्रकों के पीछे ही अब असली शायरी हो रही है… सुनाकर वाहवाही लूटी।

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