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Lucknow news- लखनऊ में जितनी तेजी से बढ़ा कोरोना, उतनी ही तेजी से बढ़े दवाओं और उपकरणों के दाम

लखनऊ। राजधानी में जिस तेजी से कोरोना संक्रमण बढ़ा है, उसी तेजी से इसकी दवाआें व चिकित्सीय उपकरणों के भी दाम बढ़े हैं। इस पर भी दवा दुकानदारों के पास इन दवाओं व चिकित्सीय उपकरणों का पर्याप्त स्टॉक नहीं है। ऐसे में महंगे रेट पर भी लोगों को कुछ दवाएं व चिकित्सीय उपकरण आसानी ने नहीं मिल पा रहे हैं।

कोरोना संक्रमण की दिन प्रतिदिन गंभीर होती स्थिति के बीच एंटीबायोटिक, पैरासिटामॉल और थर्मामीटर, बीपी मशीन, पल्स ऑक्सीमीटर, न्युमोलाइजर, वेपोलाइजर आदि के दाम कई गुना तक बढ़ गए हैं। अमीनाबाद दवा बाजार के थोक व्यापारी पर्याप्त सप्लाई न हो पाने का हवाला देकर रेट बढ़ने की बात कह रहे हैं। इससे फुटकर दुकानदार ग्राहकों को महंगे दाम पर दवा व उपकरण बेच रहे हैं।

अमीनाबाद मेडिसिन मार्केट में माल लेने आए राजाजीपुरम के मेडिकल स्टोर संचालक अंकित दीक्षित ने बताया कि दो माह के भीतर तमाम दवाओं व उपकरणों के दाम कई गुना तक बढ़ गए हैं। महीने भर पहले जो वेपोराइजर थोक में 90 से 120 रुपये में मिलता था, वो इस समय 300 रुपये का मिल रहा है। नेमोलाइजर एक हजार रुपये के अंदर मिलता था, जो अब 1400 से 2000 रुपये तक में मिल रहा है। जब महंगे रेट पर माल मिल रहा है तो महंगे में बेचना मजबूरी है। दवा दुकानदार पवन तिवारी ने बताया कि करीब दो महीने से दवाओं व उपकरणों के दाम तो बढ़ ही रहे हैं, थोक व्यापारियों के पास इनका पर्याप्त स्टॉक भी नहीं है। थोक मार्केट में इन दिनों डोलो-650, पैरासिटामॉल, कॉलपाक्स-650, डोलो ड्रॉप, डोलो सीरप, जेडी 250 व 500, आइवरमेक्टिन 12 एमजी का स्टॉक कम होने से दिक्कत आ रही है। इनके दाम भी बढ़ गए हैं। ब्लड प्रेशर मशीन 950 से 1200 रुपये तक में मिलती थी जो अब 2000 रुपये में बिक रही है। थर्मामीटर फुटकर में 200 रुपये तक में बिक रहा है। पहले इसका रेट सौ से सवा सौ था। इसी तरह पल्स ऑक्सीमीटर 1400 से 1600 रुपये तक में बिक रहा है। इसके रेट लगभग दोगुना तक बढ़ गए हैं।

रेमेडेसिविर इंजेक्शन की हो रही कालाबाजारी

कोराना संक्रमित मरीज की हालत बिगड़ने पर उसे दिए जाने वाले रेमेडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी चरम पर है। वैसे तो ये इंजेक्शन बाजार में उपलब्ध ही नहीं है, लेकिन कुछ नर्सिंग होम और दवा दुकानदार चोरी-छिपे लाकर इसे 15 से 25 हजार रुपये तक में बेच रहे हैं, जबकि इसकी असल कीमत 2000 रुपये भी नहीं है। मुख्यमंत्री के सख्त निर्देश के बावजूद इस इंजेक्शन की कालाबाजारी पर अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी है।

मांग बढ़ने और स्टॉक कम होने से बढ़े रेट

लखनऊ केमिस्ट एसोसिएशन के प्रवक्ता मयंक रस्तोगी ने बताया कि दवा व चिकित्सीय उपकरणों की मांग इन दिनों एकाएक काफी बढ़ गई है। जिन्हें जरूरत है वो तो ले ही रहे हैं, एहतियात के तौर पर भी लोग थर्मामीटर, बीपी मशीन, पल्स ऑक्सीमीटर व डोलो, पैरासिटामॉल आदि खरीदकर रख रहे हैं। इससे बाजार में इन दवाओं व उपकरणों की कमी हो गई है। इसके चलते रेट कुछ बढ़े हैं।

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