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Lucknow news- लविवि: जब डिस्पेंसरी ही ‘बीमार’ तो कैसे मिले इलाज, 11 बजे के बाद हो जाती है बंद

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लखनऊ विश्वविद्यालय पिछले काफी दिनों से कोविड संक्रमण की भयंकर चपेट में है। अब तक दर्जन से अधिक शिक्षक व कर्मचारी संक्रमित हो चुके हैं। किंतु शिक्षकों, छात्रों व कर्मचारियों की स्वास्थ्य सुविधा के लिए शुरू की गई डिस्पेंसरी की हालत खराब है। यहां न तो नियमित डॉक्टर हैं, न ही पर्याप्त दवाएं और न ही अन्य सुविधाएं। हालात ये है कि नियमित डॉक्टर न होने की वजह से कभी ये एक घंटे तो कभी डेढ़ घंटे ही खुल रही है। ऐसे में कोविड मरीजों का इजाज तो दूर सामान्य बीमारियों का उपचार भी संभव नहीं है।

विवि के पुराने कैम्पस स्थित डिस्पेंसरी में तैनात एलोपैथिक डॉक्टर का अनुबंध खत्म हुए कई महीने हो गया। उनका रिन्यूवल आगे बढ़ाने के लिए डीएसडब्ल्यू की ओर से संस्तुति की गई। वित्त समिति से भी यह पास हो गया, लेकिन लेटर जारी नहीं किया गया। हाल में एक शिक्षक सुबह 11.30 बजे डिस्पेंसरी गए तो बंद थी। जब वो अगले दिन गए तो सिर्फ कंपाउंडर व कर्मचारी मिले। ऐसे समय में जब लोग अस्पताल जाने से बच रहे हैं तो सामान्य इलाज या दवा भी डिस्पेंसरी में उपलब्ध नहीं है।

कोविड काल में शिक्षक लगातार ऑक्सीजन, आइसोलेशन व इससे जुड़ी व्यवस्था करने की मांग कर रहे हैं जबकि यहां तो सामान्य इलाज भी उपलब्ध नहीं है। हालांकि विश्विद्यालय प्रशासन का दावा है कि तीन दिन होम्योपैथी और तीन दिन न्यू कैम्पस में तैनात एलोपैथिक डॉक्टर यहां सेवा देते हैं।

लूटा दो बार कर चुका व्यवस्था करने की मांग

लखनऊ विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (लूटा) ने इसकी तरफ पूर्व में भी ध्यान आकृष्ट किया था। लूटा अध्यक्ष डॉ. विनीत वर्मा ने कुलपति प्रो. आलोक कुमार राय को पत्र भेजकर डिस्पेंसरी में बेहतर व्यवस्था करने की मांग की है। उन्होंने मांग की है कि डिस्पेंसरी में अन्य बीमारियों की दवाओं के साथ कोरोना इलाज की प्रारंभिक व्यवस्था की जाए। ऑक्सीजन सिलेंडर, एंबुलेंस व मास्क, पीपीई किट की व्यवस्था हो। डिस्पेंसरी में शिफ्ट वाइज डॉक्टर व स्टाफ की ड्यूटी लगे ताकि आकस्मिक जरूरत पर लोगों को इलाज मिल सके।

लविवि की डीएसडब्ल्यू प्रो. पूनम टंडन का कहना है कि पुराने कैम्पस में तैनात एलोपैथिक डॉक्टर सेवानिवृत्त हो गए हैं। उनके एक्सटेंशन का एप्रूवल हो गया था। उनको पत्र न जारी होने की स्थिति में कुछ कहा भी नहीं जा सकता। कोविड के इलाज या आइसोलेशन की व्यवस्था करना संभव नहीं है। होम्योपैथी के डॉक्टर यहां बैठते हैं।

लविवि के रजिस्ट्रार डॉ. विनोद कुमार सिंह का कहना है कि यह मामला संज्ञान में नहीं है, विवि खुलने पर इसे तुरंत दिखवाया जाएगा। हॉस्टल खाली हैं, ऐसे में शायद इसका समय कम किया गया हो। शिक्षक-कर्मचारियों को समय की जानकारी होगी तो वे निर्धारित समय पर जाकर चिकित्सीय परामर्श लेते होंगे। व्यवस्था बेहतर करने का प्रयास करेंगे।

लूटा दो बार कर चुका व्यवस्था करने की मांग

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