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Lucknow news- लोहिया संस्थान के निदेशक ने सप्ताह भर में दिया इस्तीफा

लोहिया संस्थान के निदेशक का सात दिन बाद ही इस्तीफा

डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रोफेसर एके त्रिपाठी ने कार्यभार ग्रहण करने के सप्ताहभर बाद ही इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने दीपावली के दिन कार्यभार ग्रहण किया था।

वह एक साल 8 माह 24 दिन लोहिया संस्थान में रहे। इस दौरान चार माह 21 दिन उन्हें निदेशक मूल कार्य से विरत रहना पड़ा। हालांकि, करीब 20 माह के दौरान बतौर निदेशक 3 लोगों के पास संस्थान का कार्यभार रहा।

लोहिया संस्थान और लोहिया अस्पताल के विलय के बाद से यहां के हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। केजीएमयू के हेमेटोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर एके त्रिपाठी को 28 फरवरी 2019 को लोहिया संस्थान की कमान सौंपी गई।
निदेशक के रूप में उन्होंने कई अहम बदलाव किए। उनके कार्यकाल में लोहिया अस्पताल और लोहिया संस्थान का विलय हुआ।
लेकिन 23 जून को मुख्यमंत्री के निरीक्षण के दौरान अव्यवस्था मिलने पर 24 जून को प्रोफेसर एके त्रिपाठी को निदेशक पद से हटा दिया गया था।
इस दौरान संस्थान के डीन डॉ. नुजहत हुसैन को चार्ज दिया गया, लेकिन अक्तूबर में उन्होंने भी इस्तीफा दे दिया। इसके बाद 3 नवंबर को अटल बिहारी वाजपेयी चिकित्सा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर एके सिंह को चार्ज दिया गया।
वह संस्थान की व्यवस्थाओं का जायजा लेना शुरू किए थे कि 13 नवंबर की रात फिर से प्रोफेसर एके त्रिपाठी को जिम्मेदारी सौंप दी गई। उन्होंने 14 नवंबर को कार्यभार ग्रहण करने के बाद व्यवस्थाओं में सुधार का दावा किया।
इमरजेंसी सहित अस्पताल की अन्य व्यवस्थाओं को गतिशील करते हुए मरीजों को त्वरित लाभ दिलाने की बात कही।
इसके तहत संस्थान में प्रतिदिन एक संकाय सदस्य को डे अफसर के रूप में तैनात किया गया। लेकिन डॉक्टर त्रिपाठी ने दो दिन पहले ही इस्तीफा दे दिया।
शनिवार देर रात शासन स्तर से उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया। इस संबंध में प्रोफेसर एके त्रिपाठी ने बताया कि वह संस्थान को प्रदेश का उच्च चिकित्सा शिक्षा संस्थान बनाने का सपना लेकर आए थे।
लेकिन उसे पूरा नहीं कर पाए हैं। व्यक्तिगत कारणों से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने कहा कि वह मरीजों की सेवा में तत्पर रहेंगे।
फैसले पर उठने लगे सवाल
लोहिया संस्थान के निदेशक को कोविड और सामान्य मरीजों के इलाज में प्रबंधन न कर पाने का आरोप लगाते हुए हटाया गया था। करीब चार माह बाद 13 नवंबर को चिकित्सा शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. रजनीश दुबे की ओर से जारी आदेश में कहा गया था कि प्रोफेसर एके त्रिपाठी को जांच कमेटी ने क्लीनचिट दी, जिसके आधार पर उन्हें दोबारा कार्यभार सौंपा गया है। इसके सप्ताह भर बाद ही प्रोफेसर त्रिपाठी का इस्तीफा देना कई सवाल खड़े कर रहा है। इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं।
आखिर क्यों लोहिया संस्थान को माना जा रहा जंजाल
अहम सवाल यह है कि प्रो त्रिपाठी को हटाने के बाद यहां की टीम डॉक्टर नुजहत हुसैन को कार्यवाहक बनाया गया, लेकिन उन्होंने भी इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद मुख्यमंत्री के ट्विटर हैंडल से ट्वीट करके प्रोफेसर एके सिंह को कार्यवाहक निदेशक बनाए जाने की जानकारी दी गई, लेकिन इस संबंध में आदेश करीब 15 दिन बाद जारी किया गया। लिखित आदेश जारी होने के बाद ही तीन नवंबर को डॉक्टर एके सिंह ने ज्वाइन किया था।
…तो क्या पहले से तय थी स्क्रिप्ट
शासन-सत्ता में दखल रखने वाले कुछ चिकित्सकों का यह भी कहना है कि प्रोफेसर त्रिपाठी के दोबारा कार्यभार ग्रहण करने और इस्तीफा देने की स्क्रिप्ट पहले से तैयार थी। उनकी बहाली के वक्त ही इस तरह के संकेत भी मिल रहे थे। हालांकि प्रोफेसर त्रिपाठी इस सवाल के जवाब में सिर्फ नो कमेंट बोलते हैं। उन्होंने दोहराया कि इस्तीफे देने की वजह पूरी तरह से व्यक्तिगत है।

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