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Lucknow news- वर्ष 2015 के चक्रानुक्रम से ज्यादातर वार्डों व पदों का बदलेगा आरक्षण, नए सिरे से करनी होगी आरक्षण की पूरी कार्यवाही

पंचायत चुनाव के लिए वर्ष 2015 में शुरू किए गए चक्रानुक्रम को आगे बढ़ाने से ज्यादातर पंचायतों के आरक्षण बदल जाएंगे। सरकार पंचायतों के आरक्षण का नया शिड्यूल जल्द जारी करने की तैयारी कर रही है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के आदेश के बाद 11 फरवरी, 2021 के शासनादेश के आधार पर प्रस्तावित आरक्षण कार्यवाही शून्य हो गई है। आरक्षण के लिए अब तक की गई पूरी मशक्कत बेकार गई। अब त्रिस्तरीय पंचायतों व पदों का नए सिरे से आरक्षण होगा। इससे पिछले कई महीने से पंचायत चुनाव की तैयारी में जुटे दावेदार एक बार फिर पंचायतों व पदों के आरक्षण को लेकर दुविधा में पहुंच गए हैं। अब उन्हें चक्रानुक्रम के हिसाब से आरक्षण की नई सूची सामने आने तक अपनी तैयारी के लिए ठिठकना पड़ेगा। 

चक्रानुक्रम व्यवस्था के अनुसार सामान्य तौर पर जिन ब्लॉकों व जिलों में पदों व प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों में कोई बदलाव नहीं हुआ है, वहां पंचायतें चक्रानुक्रम के दूसरे स्टेज के आरक्षण में चली जाएंगी। मगर, ऐसी स्थिति बहुत कम जिलों या ब्लॉकों में होने की संभावना है। वजह, पिछले पंचायत चुनाव के बाद तमाम ग्राम पंचायतों के शहरी क्षेत्र में जाने और कई नई ग्राम पंचायतों के गठन से तमाम जिलों व ब्लॉकों में पदों व प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों (वार्डों) की संख्या बढ़ या घट गई है। ऐसे में चक्रानुक्रम होने के बावजूद आरक्षण का निर्धारण सीधे तौर पर न होकर नई पंचायतों को शामिल कर किया जाएगा। इससे तमाम पंचायतों का आरक्षण उम्मीद व अनुमान से हटकर सामने आ सकता है। 

सरकार हाईकोर्ट के आदेश का अध्ययन कर रही है। जानकार बताते हैं कि नई आरक्षण कार्यवाही में जिला, ब्लॉक व ग्राम वार व जातिवार आबादी की स्थिति पहले ही स्थिति स्पष्ट हो चुकी है। ऐसे में नई कार्यवाही में प्रक्रिया में पहले जितना समय नहीं लगना है। सरकार न्यूनतम समय में आरक्षण कार्यवाही पूरी करने का शिड्यूल बनाकर चुनाव के लिए बढ़ सकती है।

इस तरह आरक्षण के आसार

 2015 के चक्रानुक्रम के हिसाब से आरक्षण की प्रक्रिया में जिला पंचायत सदस्यों व ब्लॉक प्रमुखों के लिए आरक्षण की इकाई जिले होंगे जबकि क्षेत्र पंचायत सदस्यों, ग्राम प्रधानों के आरक्षण की इकाई ब्लॉक होंगे। आरक्षण का क्रम एसटी महिला-एसटी, एससी महिला-एससी, ओबीसी महिला-ओबीसी तथा अनारक्षित महिला-अनारक्षित रहेेगा। मान लिया, किसी ब्लॉक के प्रधान के लिए पंचायतों का आरक्षण किया जाना है तो पिछले चुनाव की ग्राम पंचायतों व नव सृजित पंचायतों की संख्या एक साथ रखी जाएगी। ज्यादातर पंचायतों में एसटी आबादी नहीं है। ऐसे मान लिया कि सबसे पहले एससी वर्ग के लिए पंचायतें आरक्षित की जानी हैं। इस दशा में सबसे पहले एसी श्रेणी में आरक्षित चल रही पंचायतों को इस श्रेणी के  आरक्षण के समय अलग कर दिया जाएगा। फिर बाकी बची (पुरानी व नई) पंचायतों में से सर्वाधिक एससी आबादी वाली पंचायतों को क्रम से निश्चित संख्या में लेकर आरक्षित किया जाएगा। फिर, यही प्रक्रिया ओबीसी वर्ग के लिए अपनाई जाएगी।

दावेदारों पर बढ़ गया भार, तमाम की दावेदारी हो जाएगी बेकार

बड़ी संख्या में चुनाव के दावेदारों ने प्रस्तावित आरक्षण के हिसाब से बैनर, पोस्टर और पंफलेट छपाने, लगवाने का काम शुरू कर दिया था। जनसंपर्क व संवाद के आयोजन शुरू  कर दिए थे। समर्थकों की खातिरदारी बढ़ा दी थी। अब आरक्षण कार्यवाही करीब 25 दिन आगे बढ़ने से दावेदारों पर खर्च का बोझ बढ़ना तय हो गया है। दूसरा, आरक्षण की कार्यवाही नए सिरे से होने से तमाम दावेदारों की दावेदारी ही खतरे में पड़ने के आसार पैदा हो गए हैं। 

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