Home लखनऊ Lucknow news- विराजखंड में खंडहर हो रहे फ्लैट, दुकानें

Lucknow news- विराजखंड में खंडहर हो रहे फ्लैट, दुकानें

गोमतीनगर में अधिकारियों की लापरवाही से बर्बाद हो रही करोड़ों की संपत्तियां

गोमतीनगर के विराजखंड में 2011 में बने 32 फ्लैट और 40 दुकानों को एलडीए बेच नहीं पा रहा है। भरवारा क्रॉसिंग से पहले स्प्रिंगडेल स्कूल के पास कराए गए इन निर्माण को पूरा होने के बाद कभी बेचा ही नहीं गया। पूर्व वीसी प्रभु एन सिंह के जाने केबाद नियोजन व अभियंत्रण के अधिकारियों ने फाइल ही वापस दबा दी। अब सचिव पवन गंगवार ने दोबारा से इन निर्माणों की फाइल मांगी है। वहीं तहसीलदार असलम से उन्होंने एक रिपोर्ट बनाने के लिए भी कहा है।

सचिव पवन गंगवार का कहना है कि यह आश्चर्यजनक है कि गोमतीनगर जैसी जगह में संपत्तियों को खंडहर बना दिया गया, जहां हमेशा संपत्तियां मांग में रहती हैं। इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों से भी जबाव तलब होना चाहिए। एलडीए की इस तरह की संपत्तियों को बर्बाद नहीं होने दिया जा सकता है। मैं खुद इन संपत्तियों को निकालकर बिक्री कराना सुनिश्चित करूंगा। एलडीए का पैसा इस तरह बर्बाद नहीं होने दिया जा सकता है।

आखिर क्यों खंडहर बनाए जा रहे निर्माण?

पूर्व वीसी के समय जब इन फ्लैट और दुकानों की बिक्री करने केलिए फाइल निकाली गईं। उस समय अपार्टमेंट व दुकानों के निर्माण का ले-आउट नहीं मिलने की बात सामने आई। इसके बाद सर्वे कर ले-आउट बनाने की जिम्मेदारी अभियंत्रण और नियोजन को दी गई। कुछ दिन फाइल नियोजन और अभियंत्रण के बीच ड्राफ्ट बनाने के लिए घूमती रही। इस बीच पूर्व वीसी का तबादला हो गया। इसके बाद फाइल को डंप करा दिया गया। वीसी की नाराजगी के बाद एलडीए ने अपार्टमेंट के बाहर सफाई भी कराई। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि ऐसा कौनसा कांड हुआ है कि एलडीए के अधिकारी फ्लैट व दुकानों को बेचने से बच रहे हैं। अपार्टमेंट का निर्माण एलडीए ने एमआई बिल्डर्स से कराया था। 1 बीएचके के फ्लैट चार मंजिला टावर में बनाए गए। 2011 में करीब 1.5 करोड़ रुपये केवल फ्लैट बनाने में खर्च हुए थे।

बिना बिके ही बन गए खंडहर

मौके पर हालत यह हैं कि आठ साल के अंतराल में यहां अधिकांश फ्लैटों में तोड़फोड़ हो चुकी है। कई फ्लैट के खिड़की-दरवाजे गायब हैं। वहीं बाथरूम व किचन की स्लैब व सेनिटरीवेयर तोड़ दिए गए। बिजली की फिटिंग तक बर्बाद कर दी गई है। बिना आवंटियों को कब्जा दिए बिल्डर को भी जाने दिया गया। जबकि , रखरखाव की जिम्मेदारी उसकी होनी चाहिए थी।

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