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Lucknow news- विश्व में सबसे ज्यादा पानी खर्च कर रहे हम, प्रतिव्यक्ति 75 फीसदी घटी उपलब्धता

लखनऊ। विश्व जल दिवस पर सोमवार को जल संवाद व जल मेला कार्यक्रम आयोजित हुआ। इसमें मुख्य अतिथि जल शक्ति मंत्री डॉ. महेंद्र सिंह ने जल संचयन का संदेश दिया।

सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड, उम्मीद व नेहरू युवा केंद्र संगठन के सहयोग से वाटर एड इंडिया की ओर से गांधी भवन में आयोजित कार्यक्रम में जल शक्ति मंत्री ने कहा कि जल ही जीवन है। इसका कोई विकल्प नहीं है। जब आजाद भारत की पहली जनगणना हुई तो प्रति व्यक्ति पानी की उपलब्धता लगभग 6000 घन मीटर थी। 2001 की जनगणना में यह औसत घटकर 2000 घनमीटर और 2011 में 1500 घन मीटर ही रह गया। यानी 75 फीसदी तक उपलब्धता घट गई। उन्होंने कहा कि जिस रफ्तार से जनसंख्या बढ़ रही है और हम पानी का उपयोग व दोहन कर रहे हैं, इसमें यदि जल संचयन के सभी विकल्पों को अपना भी लें तो भी उपयोग व दोहन के मुकाबले 40 प्रतिशत ही संचयन कर पाएंगे। इससे स्थिति की गंभीरता का सहज ही अंदाजा लगा सकते हैं कि आने वाले कितने वर्षों बाद पानी की उपलब्धता एक गंभीर समस्या बनकर सामने होगी। इसलिए हमें वर्षा जल संचयन, तालाबों के संरक्षण व पानी बचाने के अन्य विकल्पों को सख्ती से अपनाना होगा। कार्यक्रम में एनएचएम के निदेशक डॉ. हीरा लाल ने कहा कि पानी की बर्बादी पर रोक लगाने के साथ साथ वर्षा जल संचयन, संवर्धन कर पानी की समस्या को कम किया जा सकता है। भूजल बोर्ड के वरिष्ठ भूगर्भ जल वैज्ञानिक आरएस सिन्हा ने कहा कि नदियों के बहाव क्षेत्र में वर्षा जल संचयन के विकल्पों का निर्माण किया जाये तो इन्हें सूखने से बचाने के साथ ही गिरते जल स्तर को भी कम किया जा सकता है। गांधी भवन परिसर में लगे जल मेला में वाटर एड इंडिया, सीजीडब्लूबी, आगा खां, माडल गांव, वॉश सॉल्यूशन, आईएजी सहित कई संस्थाओं के करीब 20 स्टॉल पर वर्षा जल संचयन के लिए लोगों को जागरूक किया गया।

जल मैराथन का समापन

वाटर एड की ओर से भदोही से 17 मार्च को शुरू हुई जल मैराथन में 290 किमी की दौड़ पूरी करने वाले धावक नायब बिन्द एवं उनके साथ साइकिल यात्रा कर रहे मुरलीधर एवं सुनील कुमार को सम्मानित किया गया। इस मौके पर वर्षा जल संचयन के लिए पहली पीआईएल दाखिल करने वाली बुजुर्ग प्रभा, बलवीर सिंह, अजीत सिंह, फर्रुख रहमान खान, पंकज हरी अरेला, अंजली त्रिपाठी, डॉ. शिशिर चंद्रा आदि मौजूद रहे।

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