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Lucknow news- सड़कें खराब होने की समस्या से अब मिलेगी राहत, यह काम करेगी सेतु निगम व पीडब्ल्यूडी की नई तकनीक 

लखनऊ में जलभराव और हैवी ट्रैफिक की वजह से सड़कें खराब होने की समस्या से अब राहत मिलेगी। फ्लाईओवर और पुलों के ऊपर भी बिटुमिन की मोटी लेयर का बोझ नहीं बढ़ेगा। यह काम सेतु निगम व पीडब्ल्यूडी की नई तकनीक माइक्रो सर्फेसिंग करेगी।

बिटुमिन की जगह टॉप लेयर में एस्फाल्ट इमल्सन का उपयोग किया जा रहा है। अधिकारियों का दावा है कि इससे सड़क पर पानी का असर नहीं होगा, वहीं मैटेरियल का उपयोग भी कम होने से सड़कों पर बोझ नहीं बढ़ेगा।
 
इसका सबसे अधिक फायदा फ्लाईओवर के ऊपर सड़कों की अतिरिक्त मोटाई बढ़ने से रोकने में मिल रहा है। सेतु निगम के परियोजना प्रबंधक मानस श्रीवास्तव ने बताया कि पहला प्रयोग माल एवेन्यू फ्लाईओवर पर किया गया था।  यहां अच्छे परिणाम मिलने के बाद लोहिया पथ पर पिकअप फ्लाईओवर पर भी माइक्रो सर्फेसिंग से सड़क बनाई गई।

वाहनों को मिल रही स्मूथ ड्राइव

सबसे बड़ा फायदा फ्लाईओवर पर यह है कि पहले की तुलना में एक तिहाई तक परत की मोटाई कम हो जाती है। इससे स्टील ज्वाइंट को सुरक्षित रखना आसान होता है। सड़क की उम्र भी अधिक होगी। माल एवेन्यू फ्लाईओवर पर पैचवर्क लगातार कराना पड़ता था।

 
अब यहां काफी समय से पैचवर्क या सडक की टॉपलेयर बनाने का काम हमें नहीं करना पड़ा है। दोनों ही फ्लाईओवर पर ट्रैफिक भी सुगमता से चल रहा है। इन सड़कों पर वाहनों को भी स्मूथ ड्राइव मिल रही है।

पानी से भी अब खतरा नहीं

पीडब्ल्यूडी के सहायक अभियंता राजीव राय का कहना है कि माइक्रो सर्फेसिंग का सबसे बड़ा फायदा यह है कि पानी का असर नहीं होता है। पानी बिटुमिन की सड़कों के लिए दुश्मन माना जाता है। शहर में जलभराव की समस्या बहुत अधिक है।

ऐसे में सड़कें भी जल्दी खराब हो जाती हैं। इमल्सन पर पानी का असर नहीं होता। इससे सड़क अधिक समय तक चलेगी। कैसरबाग में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में भी इसी तकनीक से सड़क बनाने की योजना है।

माइक्रो सर्फेसिंग क्या है?

मानस श्रीवास्तव का कहना है कि न्यूनतम साइज की गिट्टी का उपयोग बिटुमिन की जगह इमल्सन के साथ करके टॉप लेयर बनाई जाती है। नीचे की लेयर में कोई बदलाव नहीं किया जाता है। इससे टॉप लेयर पर कम मोटाई के बाद भी पकड़ व मजबूती बढ़ती है।

फ्लाईओवर के ऊपर की सड़क बनाने में इसका अधिक उपयोग है। यहां सड़क की मोटी लेयर बनाने से उसका स्ट्रक्चर डिजाइन ही बदल जाने का खतरा रहता है। लखनऊ में ही कई जगह पुलों और फ्लाईओवर के ऊपर देखने को मिल जाएगा कि एक्सपेंशन ज्वाइंट या तो दब गए या उनके गड्ढानुमा हो गए। इससे फ्लाईओवर की लाइफ भी घटती है।

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