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Lucknow news – सीएए-एनआरसी के विरोध का मामला: हाईकोर्ट ने 67 लाख रुपए की रिकवरी पर लगाई रोक, मौलाना सैफ अब्बास बोले- हमें कानून पर पूरा भरोसा था

सीएए और एनआरसी के मामले में हाईकोर्ट लखनऊ डबल बेंच ने मौलाना सैफ अब्बास से 67 लाख की रिकवरी को लेकर राहत दी है।

सीएए-एनआरसी के विरोध में दर्ज मुकदमे में मौलाना सैफ़ अब्बास को आरोपी बनाया गया हैं, लगाए गए थे पोस्टर

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सीएए और एनआरसी के मामले में हाईकोर्ट लखनऊ डबल बेंच ने मौलाना सैफ अब्बास से 67 लाख की रिकवरी को लेकर राहत दी है। तीन दिन तक हुई हाईकोर्ट में बहस के बाद हाईकोर्ट ने आज मौलाना सैफ अब्बास को दिया। मौलाना सैफ अब्बास की तरफ से उनके वकील सीनियर एडवोकेट एसएन माथुर ने बहस की बहस के बाद आज कोर्ट की डबल बेंच ने 67 लाख रुपए की रिकवरी करने के मामले में रोक लगाते हुए स्टे दिया है। सीएए-एनआरसी के विरोध में दर्ज मुकदमे में मौलाना सैफ अब्बास को आरोपी बनाया गया हैं।

मौलाना सैफ अब्बास ने कहा कि,सीएए और एनआरसी से संबंधित जो था उसमें हमें गलत तरीके से पेश कर दिया गया था। और हमको रिकवरी के लिए नोटिस भेजा गया था कि आपको 67 लाख रुपए देना है। जिस तरीके से हमारे नाम को इस मसले में शरीक किया गया था यह सोचने वाली बात है।

मौलाना ने कहा- हमें कानून पर भरोसा था

बहरहाल हमारा देश कानून और संविधान से चलता है, हमें हमारे कानून के ऊपर भरोसा था। मैं फिजिकल हियरिंग का इंतजार कर रहा था लेकिन कोरोना की वजह से वह चल नहीं पा रहा था लेकिन अब शुरू हुआ है।जब हियरिंग हो रही थी तब हमारे तरफ के अधिवक्ताओं ने कई सारी चीजें कोर्ट के सामने पेश की जिसके चलते हमें रिलीफ मिली और आज कोर्ट में इस पर रोक लगा दी। कोर्ट में कल भी बहस हुई और आज भी बहस हुई।सारे तथ्यों को हमारे खिलाफ उलट-पुलट कर दिया गया था मानो कि हमें इस मसले में किसी ने कह दिया हो कि इन्हें शरीक करना है। मेरे खिलाफ कोई भी अभी डांस और सबूत नहीं थे।

उन्होंने बताया कि,हम खुद चाहते हैं कि जो पब्लिक और गवर्नमेंट की प्रॉपर्टी है,अगर उसको कोई छती पहुंचता है तो,जो हमारे मुल्क का लॉ है उसके तहत उससे हर्जाना लिया जाए।लेकिन मेरा नाम कोई किसी भी जगह नहीं दिखा सकता,क्योंकि हर तरफ कैमरे लगे हुए हैं। कोर्ट कल से यही सब चीजें मांग रहा था। आज काफी डिटेल में बहस हुई और कोर्ट ने हमारे खिलाफ ऑर्डर हुआ था उस पर फैसला किया और हमें जो पेमेंट करना था उस पर रोक लगा दी है।

मौलाना सैफ अब्बास समेत 15 उपद्रवियों का बीते माह 6 नवम्बर को लगाया गया था पोस्टरराजधानी के चौक और ठाकुर गंज में बीते माह 6 नवंबर को पुलिस ने सीएए के विरोध में हिंसा व आगजनी करने के आरोपी मौलाना सैफ अब्बास और शिया धर्मगुरु कल्बे सादिक के बेटे कल्बे सिब्तेन नूरी समेत 15 उपद्रवियों के पोस्टर लगवा दिए गए थे। पुलिस ने जिन लोगों के पोस्टर लगवाए गए हैं, उनमें से हसन, इरशाद और आलम ने अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया था।

वहीं चौक निवासी मौलाना सैफ अब्बास, शिया धर्मगुरु कल्बे सादिक के बेटे कल्बे सिब्तेन नूरी, ठाकुर गंज में रहने वाले सलीम चौधरी, कासिफ, हलीम, नीलू, मानू, इस्लाम, आसिफ, तौकीर, जमाल और शकील अभी फरार का पोस्टर लगा था।

वहीं ज्वाइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस नवीन अरोड़ा ने कहा कि ठाकुरगंज थाने में दर्ज मामले में 27 ऐसे आरोपी थे जो हिंसा में शामिल थे। इनमें 11 लोगों को अरेस्ट किया जा चुका है और एक आरोपी ने सरेंडर कर दिया था। हालांकि, 7 आरोपियों ने कोर्ट से गिरफ्तारी का स्टे ले लिया था जिसके बाद बचे हुए 8 आरोपियों के खिलाफ गुंडा एक्ट की कार्रवाई करते हुए धारा 82 की कार्रवाई की गई है जिसमें उनके घर के बाहर डुगडुगी बजाकर नोटिस चस्पा किया गया।

पिछले साल हुआ था हिंसक प्रदर्शन

पिछले साल 2019 में 19 दिसंबर को लखनऊ में सीएए- एनआरसी को लेकर उग्र और बेहद हिंसक प्रदर्शन हुआ था। इस मामले में पुलिस ने 287 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। तोड़फोड़, आगजनी, मारपीट, लोक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम व सरकारी कार्य में बाधा समेत अन्य धाराओं में कुल 63 मुकदमे दर्ज किए गए थे। दंगाइयों ने पुलिस चौकी में भी आग लगा दी थी और आम लोगों पर जानलेवा हमला किया था।

प्रदर्शन के दौरान उपद्रवियों ने आगजनी तोड़फोड़ और पथराव भी किया था। इसके बाद सीएम योगी आदित्‍यनाथ ने प्रदर्शन में हुए नुकसान की भरपाई के लिए आरोपियों से ही वसूली करने के निर्देश दिए थे। पुलिस और प्रशासन ने कई आरोपियों की संपत्ति कुर्क करने का फरमान जारी किया था।

Input – Bhaskar.com

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