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Lucknow news- सुजीत पांडेय हत्याकांड ः 45 से पूछताछ, हत्यारे पहुंच से दूर

मोहनलालगंज। इंद्रजीतखेड़ा के पूर्व प्रधान व व्यापार मंडल के अध्यक्ष सुजीत पांडेय हत्याकांड में 45 संदिग्धों से पूछताछ के बाद भी पुलिस चौथे दिन तक खाली हाथ रही। पुलिस अभी तक यही नहीं पता लगा सकी है कि हत्या क्यों की गई? हत्यारे तो पुलिस की पहुंच से अभी बहुत दूर हैं। इस मामले में पुलिस कमिश्नर ने दो आईपीएस, दो पीपीएस व तीन इंस्पेक्टर समेत क्राइम ब्रांच, सर्विलांस की टीम को मामले के खुलासे के लिए लगा रखा है। पुलिस हत्या के पीछे अब राजनीतिक व पुरानी रंजिश के कारणों को आधार बनाकर जांच कर रही है।

वहीं दूसरी ओर वारदात के खुलासे के लिए राजनीतिक दबाव भी बनने लगा है। प्रदेश सरकार केकैबिनेट मंत्री ब्रजेश पाठक, सांसद कौशल किशोर, राज्यमंत्री वीरेंद्र तिवारी, सपा विधायक अम्बरीश पुष्कर ने वारदात के दूसरे दिन अंतिम संस्कार में शामिल होने केदौरान पुलिस को जल्द खुलासा करने का अल्टीमेट दिया था। चौथे दिन प्रदेश सरकार की मंत्री स्वाति सिंह भी परिवारीजनों से मिलने पहुंचीं। मंत्री ने पुलिस कमिश्नर व एसडीएम और इंस्पेक्टर से जल्द खुलासा करने का निर्देश दिया।

नई जातिगत राजनैतिक जमीन तैयार करने के लिए तो नहीं हुई हत्या

मोहनलालगंज इलाके की राजनीति में सुजीत पांडेय का अच्छा दखल था। प्रधानी चुनाव में रिकॉर्ड मतों से जीत हासिल की थी। इसके बाद सुजीत पांडेय लोकप्रिय होते गए। दोबारा चुनाव में महिला सीट होने पर पत्नी को मैदान में उतारकर जीत का सेहरा पहन लिया। इसी बीच मोहनलालगंज को टाउन एरिया घोषित कर दिया गया तो सुजीत पांडेय ने भी चेयरमैन पद केलिए दावेदारी कर दी थी। खुले तौर पर तो कोई दूसरा दावेदार सामने नहीं आया लेकिन कुछ लोगों को यह बात खटकने लगी। पुलिस नए राजनीतिक पृष्ठभूमि की तैयारी को लेकर हत्या के बिंदु पर भी जांच शुरू कर रही है। हालांकि सुजीत पांडेय पर हमले के समय एक युवक वहां मौजूद था। जिसने शोर भी मचाया था, पुलिस ने पूछताछ की लेकिन बदमाशों का स्केच नहीं बन सका। पुलिस जेल में बंद अपराधियों से संपर्क कर उनसे बाहर के शूटरों के बारे में जानकारी हासिल कर रही है।
अशोक यादव व सुजीत पांडेय हत्याकांड में कई समानताएं
मोहनलालगंज में दो बड़ी वारदात हुईं। इसमें प्रॉपर्टी डीलर अशोक यादव को बैंक से निकलते समय बीच कस्बे में बाइक सवार बदमाशों ने गोलियों से भून दिया था। वारदात 16 सितंबर 2019 की है। पुलिस इसका खुलासा नहीं कर सकी। 20 दिसंबर को सुजीत पांडेय की गोली मारकर हत्या कर दी गई। पुलिस इन दोनों हत्याओं में कई समानताएं देख रही है। दोनों मृतकों का प्रॉपर्टी से संबंधित कारोबार था। दोनों केपास लाइसेंसी असलहा था। दोनों अकेले चलते थे। वारदात के दिन भी दोनों खुद ही अपनी गाड़ी चला कर गए थे। वारदात का तरीका भी एक ही जैसा था। बाइक सवार बदमाशों ने गाड़ी से उतरते समय गोलियां बरसाईं। तरीका भी भाड़े के शूटरों जैसा ही था। सिर्फ अंतर इतना था कि अशोक की हत्या में .30 बोर का असलहा प्रयोग किया गया था, वहीं सुजीत पांडेय की हत्या में 9 एमएम पिस्तौल का। पुलिस को आशंका है कि दोनों वारदात एक ही गिरोह ने अंजाम तो नहीं दी हैं। शूटर भले ही अलग-अलग थे।
ठोस सुराग की तलाश में पुलिस
एडीसीपी सुरेश चन्द्र रावत के मुताबिक, सुजीत पांडेय की हत्या में अभी तक प्रॉपर्टी का कोई विवाद सामने नहीं आ रहा है। अब सिर्फ राजनीति व पुरानी रंजिश के बिंदु पर जांच चल रही है। सीसीटीवी कैमरों में शूटरों की तस्वीरें मिली हैं। हालांकि वे धुंधली हैं, उन्हें साफ कराया जा रहा है। इस मामले में अब तक 45 संदिग्ध लोगों से पूछताछ की जा चुकी है। पुलिस ने एक संदिग्ध महिला और उसके पति को भी हिरासत में लिया है। उससे पूछताछ की जा रही है। पुलिस का दावा है कि महत्वपूर्ण सुराग हाथ लग गए हैं, लेकिन पुलिस खुलासे में कोई चूक नहीं करना चाहती है। ऐसे में ठोस सुराग व कड़ी हाथ लगने के बाद ही पुष्टि की जाएगी।
अपने साथ राजदार नहीं रखते थे सुजीत
पुलिस की माने तो सुजीत पांडेय अक्सर अकेले चलते थे। उनके खास लोगों में भोला पंडित और नौकर ठाकुर था। ठाकुर उनके साथ शुरूआती दौर में चलता भी था, लेकिन उसे काफी पहले सुजीत ने मोहनलालगंज कस्बे में स्थित बाजार के राजनीतिक कार्यालय पर बैठा दिया। वहीं दोनों बेटों को भी राजनीति से दूर रखा। उनके जिम्में व्यापार का कुछ हिस्सा सुपुर्द कर दिया। वह सिर्फ अपने करीबी भोला पंडित पर भरोसा करते थे। वारदात के बाद अस्पताल पहुंचने के बाद उन्होंने पुलिस वालों से कहा कि भोला भैया को बुला दें। कोई राजदार न होने के कारण भी पुलिस अंधेरे में तीर चला रही है।

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