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Lucknow news – 2.50 लाख पॉलिटेक्निक स्टूडेंट्स निजी कंपनी के हाथों: 3500 सरकारी शिक्षक लेकिन छात्रों की क्लास लेने का एमओयू कंपनी से क्यों, अफसरों का तर्क- कंपनी के एक्सपर्ट्स निशुल्क पढ़ा रहे

यूपी में पॉलिटेक्निक के करीब ढाई लाख छात्रों की पढ़ाई का जिम्मा निजी कंपनी को सौंप दिया गया है। 22 मई से कंपनी ने आनलाइन क्लास भी शुरू कर दी है। अहम सवाल यह है कि यदि कंपनी के एक्सपर्ट्स क्लास लेंगे तो पॉलिटेक्निक कॉलेजों के नियमित शिक्षक क्या करेंगे? क्या सरकार को अपने शिक्षकों पर भरोसा नहीं है? अफसर तर्क दे रहे हैं कि निजी कंपनी द्वारा छात्रों को पढ़ाने के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जा रहा है, मगर यह एक बड़ा सवाल है कि निशुल्क पढ़ाने से आखिरकार कंपनी को क्या लाभ है?

22 मई से शुरू हुई कंपनी की आनलाइन क्लास

लॉक डाउन के दौरान पढ़ाई प्रभावित न हो इसके चलते सरकार ने शैक्षिक संस्थानों में ऑनलाइन पढ़ाई शुरू कराए जाने के निर्देश दिए हैं। 22 मई से संचालित हो रही कक्षाओं को पॉलिटेक्निक के शिक्षक नहीं बल्कि एक निजी कंपनी ‘सॉफ्ट प्रो’ के एम्प्लॉई ले रहे हैं। प्राविधिक शिक्षा विभाग की ओर से पॉलिटेक्निक संस्थानों में ऑनलाइन पढ़ाई को लेकर की गई इस व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। अचरज भरी बात यह है कि विभाग ने ऑनलाइन पढ़ाई की जिम्मेदारी शिक्षकों को न देकर एक प्राइवेट कंपनी के हाथों में सौप दी है। उधर दूसरी ओर शिक्षकों में भी इस बात को लेकर रोष है। उनका कहना है कि जिन्हें न तो कोर्सवर्क का पता और न ही कंटेंट नॉलेज है, उन्हें भविष्य संवारने की जिम्मेदारी कैसी सौंप दी गई? हालांकि कंपनी की ओर से दावा किया गया है कि उनके एक्सपर्ट स्टूडेंट्स को पढ़ा रहे हैं और उनका इवैल्यूएशन भी करेंगे। दिलचस्प बात यह है कि यह सारी सुविधाएं कंपनी द्वारा निशुल्क मुहैया कराई जा रही है।

शिक्षक बोले, फिर हमारा क्या काम

शिक्षकों के काम को एक निजी कंपनी को सौंपा जाने से पॉलिटेक्निक में पढ़ाने वाले करीब साढ़े तीन हज़ार शिक्षकों में विरोध पनप रहा है पर अभी कोई खुलकर बोलने को तैयार नही। दबे स्वर में शिक्षकों का कहना है कि एक आउट साइडर निजी कंपनी को पॉलिटेक्निक कोर्स के बारे में क्या मालूम। इससे भी तो बड़ा सवाल यह है कि अगर निजी कंपनी के एम्प्लॉई ऑनलाइन आएंगे तो हम क्या करेंगे। इतना ही नहीं निजी कंपनियों द्वारा स्टूडेंट्स का ब्यौरा मांगना और इसका डाटा जुटाया जाना भी प्राइवेसी के लिहाज से उचित नहीं है।

निजी कंपनी पर भरोसा अपने शिक्षकों पर नहीं

प्रदेशभर की पॉलिटेक्निक संस्थाओं में ऑनलाइन क्लास संचालन एक बड़ी चुनौती है ऐसे में विभाग की ओर से एक बात की दलील दी जा रही है कि ऑनलाइन क्लास संचालन के पीछे इंफ्रास्ट्रक्चर मैनेजमेंट एक बड़ा टास्क है। साथ ही एक्सपर्ट अच्छी ग्रूमिंग करेंगे।

कंपनी बोली हमारे एक्सपर्ट्स से छात्र इंडस्ट्री के बारे में ज्यादा जान सकेंगे

वही दैनिक भास्कर ने इस बाबत जब कंपनी की सीईओ यशी अस्थाना से बात की तो उनका कहना था कि 2004 में रजिस्टर्ड हुई यह कंपनी प्रोफेशनल कोर्सेज की ट्रेनिंग देती है। 02 मार्च 2021 को प्राविधिक शिक्षा विभाग से एमओयू साइन हुआ था। हम वेब प्लेटफार्म पर ही स्टूडेंट्स को पढ़ा रहे है। प्रदेश भर के स्टूडेंट्स को 4 जोन, सेंट्रल,ईस्ट,वेस्ट व बुंदेलखंड में बांटा गया है।और 4 ही फेज में पढ़ाई भी की जाएगी।14 एक्सपर्ट्स की टीम कंप्यूटर साइंस के स्टूडेंट्स को पाइथन व पीएचपी,मैकेनिकल व सिविल ट्रेड में ऑटो कैड और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग को एम्बेडेड सिस्टम व फर्स्ट ईयर के छात्रों को कम्युनिकेशन स्किल्स की मुफ्त क्लासेज दी जा रही है साथ ही हम इन स्टूडेंट्स के प्लेसमेंट में भी सपोर्ट करेंगे। हां, यह भी है कि हमारे एक्सपर्ट्स से स्टूडेंट्स इंडस्ट्री इंटरफ़ेस के बारे में ज्यादा जान सकेंगे।

कंपनी निशुल्क पढ़ा रही है, शिकायत हुई तो कार्रवाई होगी

वही विभाग के निदेशक मनोज कुमार ने कहां कि स्टूडेंट्स के बेहतरी के लिए यह एमओयू किया गया है पर हमारे शिक्षक भी पढ़ा रहे है। हां, सॉफ्ट प्रो निशुल्क क्लासेज देगी,और किसी तरह की शिकायत का मौका नही देगी,वर्ना कार्यवाही भी होगी।

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