Home लखनऊ Lucknow news - UP में पशुधन घोटाला प्रकरण: फरार IPS अरविंद सेन...

Lucknow news – UP में पशुधन घोटाला प्रकरण: फरार IPS अरविंद सेन पर 25 हजार का इनाम घोषित, 50 हजार का इनामी निलंबित सिपाही सरेंडर करने से पहले गिरफ्तार

मुकदमे में वांछित 50 हजार के इनामी निलंबित सिपाही दिलबहार सिंह यादव को सोमवार रात गिरफ्तार कर लिया गया। बताया जा रहा है कि वह मंगलवार को कोर्ट में सरेंडर कर सकता था।

लखनऊ की विशेष अदालत ने सोमवार को IPS की वारंट रिकॉल अर्जी खारिज कीदो साल पहले साल 2018 में सामने आया था घोटाला, इंदौर के व्यापारी ने दर्ज कराया था केस

उत्तर प्रदेश में पशुपालन घोटाले में फरार चल रहे IPS अरविंद सेन पर सोमवार रात 25 हजार का इनाम लखनऊ पुलिस ने घोषित किया है। वहीं, मुकदमे में वांछित 50 हजार के इनामी निलंबित सिपाही दिलबहार सिंह यादव को गिरफ्तार कर लिया गया। दिलबहार ने सोमवार को विशेष अदालत में जमानत अर्जी दाखिल की थी।

संभावना थी कि वह मंगलवार यानी आज अदालत में सरेंडर कर सकता है। लेकिन इससे पहले ही पुलिस कमिश्नर DK ठाकुर की टीम ने यादव को गिरफ्तार कर लिया। अब तक इस मुकदमे में 9 आरोपियों को पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है।

फरार IPS अरविंद सेन।

फरार IPS अरविंद सेन।

IPS अरविंद सेन की अर्जी खारिज

वांछित सीनियर IPS अफसर अरविंद सेन के खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट को रिकाल करने की मांग वाली अर्जी भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विशेष अदालत ने खारिज कर दिया है। बीते 10 दिसंबर को विशेष जज संदीप गुप्ता ने इस मामले की विवेचक व एडीशनल कमिश्नर ऑफ पुलिस गोमतीनगर, श्वेता श्रीवास्तव की अर्जी पर अरविंद सेन के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी करने का आदेश दिया था।

सोमवार को विशेष अदालत में अरविंद सेन की ओर से गैर जमानती वारंट को रिकाल करने की अर्जी दी गई। यह कहते हुए कि इस मामले में उनकी अग्रिम जमानत याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई विचाराधीन है। ऐसे में इस दौरान उनकी गिरफ्तारी से अग्रिम जमानत याचिका आधारहीन हो जाएगी। लिहाजा उनके विरुद्ध जारी गैर जमानती वारंट को रिकाल किया जाए।

दो साल पहले खुली थी पोलसाल 2018 में पशुधन घोटाले की पोल तब खुली थी, जब इंदौर के व्यापारी मंजीत सिंह भाटिया ने लखनऊ के हजरत गंज कोतवाली में मुकदमा दर्ज करवाया था। पीड़ित ने आरोप लगाया था कि पशुधन विभाग में 214 करोड़ के टेंडर देने के एवज में तीन फीसदी कमीशन का प्रस्ताव मिला था। जिस पर एक फीसदी कमीशन के तौर पर एक करोड़ रुपए का भुगतान कर दिया था। आरोप है कि 31 अगस्त को उसे फिर बुलाया गया और पशुपालन विभाग के विधानसभा सचिवालय स्थित सरकारी कार्यालय में आशीष राय ने खुद को एसके मित्तल बताकर उससे मुलाकात की और फर्जी वर्क ऑर्डर की कापी से दी। फिर उससे कई बार करोड़ों रुपए वसूले गए।

फर्जी टेंडर दिलाने का है मामलापशुपालन विभाग में 214 करोड़ का टेंडर दिलाने के नाम पर करोड़ों रुपये हड़पने के मामले में एसटीएफ ने सिपाही के अलावा नौ आरोपितों को गिरफ्तार चुकी है। इसमें पशुधन, मत्स्य एवं दुग्ध विकास राज्यमंत्री जयप्रकाश निषाद का प्रधान निजी सचिव रजनीश दीक्षित, सचिवालय का संविदा कर्मी धीरज कुमार देव, कथित पत्रकार एके राजीव व खुद को पशुपालन विभाग का उपनिदेशक बताने वाला आशीष राय शामिल हैं। फर्जीवाड़े का यह खेल वर्ष 2018 में शुरू हुआ था। इसके पीछे IPS अधिकारी अरविंद सेन, राजधानी में तैनात एक इंस्पेक्टर व अन्य पुलिसकर्मियों की संलिप्तता भी उजागर हुई थी। पशुपालन विभाग में फर्जी टेंडर के माध्यम से नौ करोड़ 72 लाख रुपये की ठगी की शिकायत मिली थी।

Input – Bhaskar.com

Most Popular