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UPSC टॉपर शुभम कुमार ने पांच सालो मे नहीं देखी कोई फ़िल्म, इस रणनीति से IAS जैसे कठिन परीक्षा में पाया पहला स्थान

यूपीएससी परीक्षा में सफलता प्राप्त करने के लिए सबसे पहले जरूरी होता है कि विद्यार्थी एक सही रणनीति बनाएं क्योंकि बिना सही रणनीति के कोई भी विद्यार्थी इसमें सफलता प्राप्त नहीं कर सकता है.

आईएएस बनने के लिए आपको ईमानदारी के साथ कड़ी मेहनत करने की आवश्यकता पड़ती है तभी कोई भी आईएसएस परीक्षा पास कर पाता है और इस पद को हासिल कर पाता है.

इस बार आई एस की परीक्षा में टॉप हुए शुभम कुमार ने बताया कि इस परीक्षा में पास करने के लिए आपको ईमानदारी के साथ मेहनत करना जरूरी है तभी आप इस परीक्षा को पास कर पाएंगे.

शुभम से जब मीडिया ने इंटरव्यू लिया तो उन्होंने कहा कि मैंने 7 साल तक कोई फिल्म नहीं देखी.जानिए कैसे शुभम कुमार ने यूपीएससी की परीक्षा पास करने के लिए सही रणनीति बनाई:

यूपीएससी जैसी परीक्षा में कैसे सफलता मिल सकती है. कितने घंटे की पढ़ाई और रीड़िंग मैटेरियल क्या होनी चाहिए?

शुभम ने बताया कि किसी भी परीक्षा को पास करने के लिए आपके पास एक सही रणनीति होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि वह दिल्ली में 6 महीने तक एक कोचिंग में पढ़ाई किया लेकिन उसके बाद उन्होंने सेल्फ स्टडी करना शुरू कर. सुभम ने कहा कि आजकल हर तरह के स्टडी मैटेरियल इंटरनेट पर मिल जाते हैं. ऑनलाइन न्यूजपेपर का सब्सक्रिप्शन भी मिल जाता है. बस जरूरी है कि ईमानदारी से मेहनत किया जाए.

आप सोशल मीडिया के कौन से प्लेटफाॅर्म से जुड़े हैं?

शुभम ने बताया कि मैंने आईएएस की तैयारी के दौरान किसी भी तरह का सोशल मीडिया का यूज नहीं किया. उन्होंने कहा कि मुझे खबर मिली है कि मेरे नाम से कई सारे फेक अकाउंट बने हैं. मैंने आज ही अपना एक टि्वटर अकाउंट बनाया है.

शुभम ने कहा कि उन्होंने अपने दोस्त के साथ दिल्ली में रहकर पढ़ाई की और लगभग 7 से 8 घंटे कड़ी मेहनत से पढ़ाई करने के बाद उन्हें सफलता मिली. उन्होंने कहा कि उन्होंने हर सब्जेक्ट के लिए एक अलग से रूटीन तैयार किया और पूरी ईमानदारी के साथ उस सब्जेक्ट की तैयारी की. शुभम ने बताया कि प्री और मेंस का तैयारी एक साथ ही करना चाहिए तभी सफलता मिलने के चांस ज्यादा रहते हैं.

आपको कब लगा कि हम ऐसा कर सकते हैं और इसमें सबसे ज्यादा किनका योगदान रहा?

उन्होंने बताया कि मैं बचपन से आईएएस की परीक्षा पास करना चाहता था.वर्ष 2018 में दिल्ली में आकर रणनीति के साथ तैयारी शुरू की. छह-सात महीने एक कोचिंग से जुड़ा. उसके बाद सेल्फ स्टडी के तहत ही तैयारी करने लगी. उन्होंने बताया मेरे लक्ष्य को पाने में मेरे पूरे परिवार ने मेरा साथ दिया खासकर मेरे माता पिता ने.

अपने गुरुजन व गांव के लिए आप क्या योगदान देंगे?

उन्होंने कहा कि मेरे सफल होने मेरे गुरुजनों का काफी ज्यादा हाथ रहा है . उन्होंने कहा कि मेरा इलाका काफी ज्यादा पिछड़ा और मेरी कोशिश रहेगी कि मैं पिछड़े इलाकों के लिए काम करू और उनका विकास करू.

पसंदीदा खाना, पसंदीदा फिल्म, संगी, हीरो-हीरोइन, खेल, हॉबी के बारे में कुछ बताएं?

शुभम ने बताया कि मुझे सादा खाना पसंद है जो ग्रामीण क्षेत्र में मिलता है. उन्होंने कहा कि मैंने कई सालों से कोई फिल्म नहीं देखी इसलिए मुझे हीरो हीरोइन के बारे में बिल्कुल भी नहीं पता. खेल के बारे में उन्होंने बताया कि मुझे वॉलीबॉल और टेनिस खेलना पसंद है.

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